मुंबई और उपनगरों की लगभग 350 से अधिक सेल्फ-फाइनेंस स्कूलों पर हजारों शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों का भविष्य निर्वाह निधि (PF) हड़पने का गंभीर आरोप ‘मुंबई शहर शिक्षक विकास मंडल’ ने लगाया है। इस अन्याय के खिलाफ अब 1 जून 2026 से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा और शिक्षक नेता डॉ. विशाल कडणे ने आर-पार की लड़ाई का इशारा दिया है।
मुंबई में ऐसी कई बड़ी स्कूलें हैं, जहां 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। नियमों के अनुसार, ऐसी संस्थाओं के लिए ‘कर्मचारी भविष्य निर्वाह निधि संगठन’ (EPFO) में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। लेकिन आरोप है कि कई स्कूल प्रबंधन ने या तो पंजीकरण ही नहीं कराया या कर्मचारियों के वेतन से PF काटने के बावजूद उसे सरकारी खाते में जमा नहीं किया।
मुंबई शहर शिक्षक विकास मंडल’ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मुंबई की 350 से 400 स्कूलों में 15 हजार से 20 हजार शिक्षक और गैर-शिक्षकीय कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन स्कूलों में कर्मचारियों की संख्या 20 से 75 के बीच होने के बावजूद उन्हें जानबूझकर PF के लाभ से वंचित रखा जा रहा है।
‘कर्मचारी भविष्य निर्वाह निधि अधिनियम 1952’ के अनुसार, जिस संस्था में 20 या उससे अधिक कर्मचारी होते हैं, वहां PF कानून लागू होता है। इसमें कर्मचारी का 12% और प्रबंधन का 12% हिस्सा मिलाकर कुल 24% राशि जमा करना आवश्यक होता है। डॉ. विशाल कडणे का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन अपना 12% हिस्सा बचाने के लिए खुलेआम कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।
PF केवल बचत का साधन नहीं है, बल्कि इसके साथ कर्मचारियों को कई अन्य लाभ भी मिलते हैं। EDLI योजना के तहत PF धारक की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। रिटायरमेंट के बाद नियमित मासिक पेंशन की भी सुविधा होती है। डॉ. विशाल कडणे ने कहा कि जो स्कूल PF नहीं दे रहे हैं, वे कर्मचारियों को इन बीमा और पेंशन लाभों से भी वंचित कर रहे हैं, जो बेहद गंभीर मामला है।
इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मुंबई शिक्षक संगठन ने आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “PF शिक्षकों की खून-पसीने की कमाई है। इसे हड़पने वाली स्कूलों पर जब तक आपराधिक मामले दर्ज नहीं होंगे, तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे।” संगठन ने कहा कि 1 जून से शुरू होने वाला आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में फैलाया जाएगा और सरकार व शिक्षा विभाग से जवाब मांगा जाएगा।
कई शिक्षक नौकरी जाने के डर से शिकायत करने आगे नहीं आते। लेकिन मुंबई शहर शिक्षक विकास मंडल ने ऐसे कर्मचारियों से मदद के लिए आगे आने की अपील की है। शिकायत करने वाले शिक्षकों का नाम और जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। भगवान सागर और मंडल की कार्यकारिणी ने अन्याय सहने के बजाय अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। शिक्षक नेता डॉ. विशाल कडणे ने कहा, “शिक्षण संस्थाओं द्वारा मुनाफाखोरी के लिए शिक्षकों के अधिकारों का हनन करना नैतिक अपराध है। हम कानूनी रास्ते से इन स्कूलों पर कार्रवाई करवाएंगे।”
