मुंबई के बांद्रा (पूर्व) स्थित डॉ. बलिराम हिराय कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर के प्राचार्य सुनील मगदूम (64) को सत्र न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया। एक छात्रा निधि रायत ने खेरवाड़ी पुलिस स्टेशन में सुनील मगदूम के खिलाफ धोखाधड़ी की FIR दर्ज कराई गयी थी।
FIR के अनुसार निधि रायत ने मुंबई के बांद्रा पूर्व स्थित एन.एल.एस. रहेजा कॉलेज में प्रवेश लिया था, लेकिन बाद में कॉलेज बदलने का फैसला किया। उसके एक मित्र ने उसे डॉ. बलिराम हिराय कॉलेज की सिफारिश की। निधि रायत ने कॉलेज के प्राचार्य सुनील मगदूम से मुलाकात की, जिन्होंने बताया कि कॉलेज शैक्षणिक वर्ष 2021-2022 से इंटीरियर बैचलर ऑफ वोकेशनल कोर्स चला रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज मणिपुर की संगाई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से संबद्ध है।
आरोप है कि प्राचार्य सुनील मगदूम ने यह दावा भी किया था कि तीसरे वर्ष में कॉलेज की ओर से छह महीने की इंटर्नशिप दी जाएगी और कैंपस इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे, जिससे छात्रों को नौकरी के अवसर मिलेंगे। उन्होंने यह भी कथित तौर पर कहा था कि संगाई यूनिवर्सिटी को यूजीसी की मान्यता प्राप्त है।
इन दावों से प्रभावित होकर निधि रायत ने शैक्षणिक वर्ष 2023-2024 के लिए 80,000 रुपये जमा किए। निधि रायत ने दावा किया कि सितंबर 2024 में उसे यूजीसी द्वारा 15 मई 2024 को जारी एक नोटिस के माध्यम से पता चला कि 2015 में स्थापित संगाई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, मणिपुर एक स्वयंभू और गैर-मान्यता प्राप्त संस्था है, जबकि वह मान्यता प्राप्त होने का दावा कर रही थी।
आरोप है कि कॉलेज ने छात्रों को इस बारे में न तो जानकारी दी और न ही जागरूक किया तथा प्रवेश प्रक्रिया जारी रखकर छात्रों को गुमराह किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने प्राचार्य सुनील मगदूम से सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संगाई यूनिवर्सिटी से बातचीत चल रही है। जब तीसरे वर्ष का सेमेस्टर शुरू हुआ, तब कॉलेज ने कथित रूप से इंटर्नशिप उपलब्ध नहीं कराई। निधि रायत ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज ने समय पर परीक्षाएं नहीं कराईं और परीक्षाएं समाप्त होने के बाद भी परिणाम घोषित नहीं किए गए।
निधि रायत का आरोप है कि वर्ष 2021 से अब तक कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज़ और उससे जुड़े अधिकारियों, जिनमें प्राचार्य और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, ने छात्रों को सिक्किम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से संबद्धता का झूठा दावा करके गुमराह किया, जिससे छात्रों को शैक्षणिक और आर्थिक नुकसान हुआ।
अग्रिम जमानत की मांग करते हुए प्राचार्य सुनील मगदूम ने दलील दी कि हिराय स्कूल ऑफ डिज़ाइन में प्रवेश और नामांकन के समय छात्रों को पूरी जानकारी थी कि उनका संबंध संगाई यूनिवर्सिटी से होगा, क्योंकि यह तथ्य शैक्षणिक वर्ष 2021-2022 के प्रवेश फॉर्म में उल्लेखित था। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में यूजीसी द्वारा संगाई यूनिवर्सिटी को बंद किए जाने की जानकारी मिलने पर संस्थान ने छात्रों के हित में पूरी सावधानी और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया।
हालांकि अदालत ने उनकी दलील स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और कहा, “यूजीसी ने विभिन्न तिथियों पर नोटिस जारी कर स्पष्ट किया था कि संगाई यूनिवर्सिटी मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन आरोपियों ने छात्रों को अंधेरे में रखा, केवल उन्हें ठगने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के इरादे से। आरोपियों पर फर्जी मार्कशीट तैयार करने का भी आरोप है। उन्हें कोई भी कोर्स चलाने या परीक्षा लेने का अधिकार नहीं था, फिर भी उन्होंने वर्षों तक छात्रों के साथ धोखाधड़ी की।”
अदालत ने आगे कहा, “यह आरोपी प्राचार्य है और प्रशासनिक पद पर रहते हुए छात्रों को उचित शिक्षा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार था। प्रथम दृष्टया उसका आचरण दर्शाता है कि उसे इस धोखाधड़ी की जानकारी थी। इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इस धोखाधड़ी ने छात्रों की शैक्षणिक शिक्षा को नुकसान पहुंचाया। छात्रों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। यह गंभीर अपराध है और इसकी उचित जांच आवश्यक है।”
इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने सुनील मगदूम को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया।
