दिवंगत मधु दंडवते
महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत कोंकण रेलवे नेटवर्क के सावंतवाड़ी रेलवे स्टेशन का नाम पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और वरिष्ठ समाजवादी नेता दिवंगत मधु दंडवते के नाम पर रखा जाएगा। यह निर्णय कोंकण रेलवे परियोजना को साकार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के लिए लिया गया है। साथ ही मंत्रिमंडल ने डोंबिवली में पिंपलेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा कब्जा की गई 4.25 एकड़ जमीन पर बने ढांचों, जिन्हें आधिकारिक रूप से अतिक्रमण घोषित किया गया था, को नियमित करने तथा उक्त भूखंड को नाम मात्र दर पर ट्रस्ट को हस्तांतरित करने को भी मंजूरी दी। दोनों फैसले राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए।
अब राज्य सरकार स्टेशन का नाम बदलने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजेगी। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद स्टेशन का आधिकारिक नाम ‘लोकमान्य मधु दंडवते रेलवे टर्मिनस’ कर दिया जाएगा।
मधु दंडवते, जो केंद्रीय वित्त मंत्री भी रह चुके थे, को व्यापक रूप से कोंकण रेलवे का शिल्पकार माना जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि वरिष्ठ समाजवादी नेता ने लगातार कोंकण क्षेत्र की रेल संपर्क संबंधी समस्याओं को उठाया और लंबे समय से लंबित कोंकण रेलवे परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विज्ञप्ति में कहा गया, “यह निर्णय कोंकण क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को दर्शाता है और लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करता है।”
प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता दंडवते, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में प्रमुख विपक्षी आवाजों में से एक थे और आपातकाल के दौरान जेल भी गए थे। 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी की जीत के बाद उन्हें मोरारजी देसाई सरकार में रेल मंत्री बनाया गया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुधार शुरू किए, जिनमें रेलवे आरक्षण का कंप्यूटरीकरण भी शामिल था। इस कदम से बुकिंग क्लर्कों द्वारा होने वाले भ्रष्टाचार में कमी आई और यात्रियों की अनिश्चितता भी घटी। उन्होंने 1978-79 में आप्टा-रोहा लाइन से कोंकण रेलवे परियोजना के पहले चरण को भी मंजूरी दी थी।
मधु दंडवते के सबसे उल्लेखनीय यात्री-हितैषी फैसलों में स्लीपर कोचों में लकड़ी की बर्थ की जगह गद्देदार बर्थ लगवाना शामिल था। सांसद के रूप में उन्होंने 1985 में दल-बदल विरोधी कानून लागू किए जाने के दौरान भी अहम भूमिका निभाई और राजनीतिक दलों के भीतर असहमति की रक्षा के लिए सुरक्षा प्रावधान शामिल करने की वकालत की।
एक अन्य निर्णय में राज्य मंत्रिमंडल ने डोंबिवली के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मौजे सागांव-सोनारपाड़ा के श्री पिंपलेश्वर देवस्थान मंदिर ट्रस्ट को 4.25 एकड़ जमीन आवंटित करने को भी मंजूरी दी। ट्रस्ट ने इस जमीन पर बने ढांचों को नियमित करने और भूखंड को नाममात्र दर पर आवंटित करने की मांग की थी। यह प्रस्ताव महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) ने औपचारिक प्रस्ताव के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा था।
मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद MIDC अब भूखंड पर हुए अतिक्रमणों को नियमित करने और जमीन को नाममात्र कीमत पर ट्रस्ट को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि इस फैसले को भविष्य के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा और MIDC को अपनी जमीनों पर अतिक्रमण से निपटने के लिए व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
