मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विभिन्न ऑनलाइन लोन मोबाइल ऐप्स के लिए काम करने वाले छः लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने एक बैंक कर्मचारी, जिसने इन ऐप्स से लोन लिया था, से पैसे वसूलने के लिए लगातार उसे और उसके परिवार को धमकाया।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम नारायण गोरिवाले (28), पांडुरंग जाधव (49), सुखदेव थोरात (28), चंदकांत वाघारे (27), मदनलाल जायसवाल (28) और वाल्मीकि गेनालाल गुप्ता (21) हैं। मंगलवार को इन्हें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट, एस्प्लेनेड में पेश किया गया। न्यायालय ने इन्हें 30 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
बैंक कर्मचारी अक्षय सिंह की शिकायत पर क्राइम ब्रांच की यूनिट-2 ने सोमवार रात इन आरोपियों को इन्हें गिरफ्तार किया।
अक्षय सिंह के अनुसार उन्होंने पिछले साल अप्रैल में 18 अलग-अलग ऑनलाइन मोबाइल लोन ऐप्स से कुल 7.05 लाख रुपये का कर्ज लिया था। उनका दावा है कि अब तक वे कुल मिलाकर 17.60 लाख रुपये चुका चुके हैं, लेकिन ऐप्स में अभी भी 10.08 लाख रुपये बकाया दिखाया जा रहा है।
इसी राशि की रिकवरी के लिए आरोपी लगातार उन्हें, उनके परिवार के सदस्यों और ऑफिस कर्मचारियों को फोन कर मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। साथ ही, वे रोज ऑफिस आकर पैसे देने के लिए धमकियां भी दे रहे थे। अक्षय सिंह ने दावा किया कि काफी रकम चुकाने के बावजूद आरोपी झूठे तरीके से भारी और अतिरिक्त ब्याज जोड़कर और अधिक पैसे की मांग कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
अक्षय सिंह का यह भी आरोप है कि मोबाइल ऐप्स ने कथित रूप से उनके मोबाइल फोन के डेटा तक पहुंच हासिल कर ली और उनसे तथा उनके परिवार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी निकालकर प्रसारित की। इसके बाद उन्हें कई धमकी भरे कॉल आने लगे।
पुलिस ने आरोपियों की हिरासत मांगते हुए कहा कि उन्होंने शिकायतकर्ता की पत्नी का नंबर हासिल कर उसे अश्लील गालियां दीं, जिसकी आगे जांच की जानी है।
आरोपियों की ओर से पेश वकील हितेश पटेल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह किसी निजी बैंक द्वारा ऑनलाइन मोबाइल लोन ऐप्स के खिलाफ रची गई बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
हितेश पटेल ने तर्क दिया, “शिकायतकर्ता एक बैंक कर्मचारी है और ऐसा लगता है कि उसने लोन लिया, लेकिन अब वह उसे वापस नहीं करना चाहता। इसलिए भुगतान से बचने के लिए उसने यह झूठा मामला दर्ज कराया है।”
हालांकि, अदालत ने जांच एजेंसी को आरोपों की जांच का अवसर देने के लिए आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया।
