बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को पवई के हिरानंदानी गार्डन्स स्थित एक हाईराइज इमारत की कॉमन टेरेस तक पहुंच रोकने वाले अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने एविटा को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की याचिका पर यह आदेश पारित किया। सोसाइटी ने मांग की थी कि 29वीं मंजिल के एक निवासी द्वारा कॉमन टेरेस के विशेष उपयोग, कब्जे और अधिकार को अवैध घोषित किया जाए।
हाउसिंग सोसाइटी की ओर से अधिवक्ता सोनल ने अदालत को बताया कि मार्च 2004 में फायर ब्रिगेड ने इमारत के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया था। इसमें शर्त थी कि इमारत में कुछ स्थानों, जिनमें टेरेस भी शामिल है, को ‘रिफ्यूज एरिया’ के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा और सभी निवासियों को वहां पहुंच उपलब्ध होगी। बाद में इसी फायर NOC के आधार पर इमारत को ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (OC) भी दिया गया।
हालांकि, टेरेस तक जाने वाली कॉमन सीढ़ी को बंद कर दिया गया और 29वीं मंजिल के एक फ्लैट से टेरेस तक जाने के लिए अलग सीढ़ी बना दी गई। इस सीढ़ी और टेरेस तक केवल उस फ्लैट के खरीदार अजीत पटेल की पहुंच थी।
हाईकोर्ट द्वारा BMC से मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहे जाने के बाद नगर निगम अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने माना कि फ्लैट नंबर 2902 और टेरेस में अनधिकृत बदलाव किए गए थे। इन बदलावों के कारण टेरेस तक आम लोगों की पहुंच बंद हो गई थी और 29वीं मंजिल के फ्लैट से टेरेस तक विशेष पहुंच मिल गई थी।
इसके बाद BMC ने महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग (MRTP) एक्ट की धारा 53(1) के तहत अजीत पटेल और हाउसिंग सोसाइटी को नोटिस जारी किया। 10 अगस्त 2025 को BMC ने अनधिकृत निर्माण हटाने का आदेश भी पारित किया।
अजीत पटेल का कहना था कि बिल्डर लेकव्यू डेवलपर्स ने उन्हें 1,305 वर्ग फुट का फ्लैट बेचने के साथ उसके ऊपर स्थित टेरेस का हिस्सा और टेरेस तक जाने वाली अंदरूनी सीढ़ी भी बेची थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि टेरेस को दो हिस्सों में बांटा गया था—एक हिस्सा उनके विशेष कब्जे में था, जबकि दूसरा हिस्सा सभी के लिए खुला था।
हालांकि, डेवलपर ने इस दावे का विरोध किया। उसका कहना था कि अजीत पटेल को केवल फ्लैट बेचा गया था और उन्होंने टेरेस पर विशेष कब्जा कर लिया, जबकि इसे सभी निवासियों के लिए रिफ्यूज एरिया के तौर पर खुला रखा जाना था।
BMC द्वारा अनधिकृत बदलावों के संबंध में विस्तृत आदेश पारित किए जाने का संज्ञान लेते हुए अदालत ने 5 अगस्त को BMC को उस आदेश को लागू करने और अनधिकृत बदलाव हटाने का निर्देश दिया।
खंडपीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि BMC 10 अगस्त 2025 को पारित आदेश के आधार पर कार्रवाई करे। यह आदेश पटेल को नोटिस जारी करने और उनके जवाब पर विचार करने के बाद कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए पारित किया गया था।
अदालत ने अधिकारियों को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि फायर ब्रिगेड को पता चलता है कि मार्च 2004 के फायर NOC में अन्य रिफ्यूज एरिया, अग्नि सुरक्षा और फायर-फाइटिंग से जुड़ी शर्तों का पालन नहीं किया गया है, तो वे उचित कार्रवाई कर सकते हैं। इसमें इमारत का ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (OC) वापस लेना भी शामिल है।
