महाराष्ट्र में डॉक्टरों को अब अपने क्लीनिक पर 31 अक्टूबर से पहले QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। इस QR कोड के जरिए मरीज डॉक्टर के पंजीकरण और योग्यता की जानकारी सत्यापित कर सकेंगे। नियम का पालन नहीं करने पर 15,000 रुपये तक का जुर्माना और पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है।
महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) ने 9 सितंबर को राज्य सरकार की ‘Know Your Doctor’ (KYD) पहल के तहत यह व्यवस्था अनिवार्य की है। इसका उद्देश्य फर्जी और अयोग्य डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
क्लीनिक में ऐक्रेलिक प्लेट पर लगाए गए QR कोड को स्कैन करने पर डॉक्टर का नाम, शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण बोर्ड और प्रैक्टिसिंग लाइसेंस की वैधता जैसी जानकारी सामने आएगी। डॉक्टरों को अपने प्रत्येक क्लीनिक में QR कोड प्रदर्शित करना होगा। अस्पतालों को भी अपने परिसर में मौजूद प्रत्येक पंजीकृत डॉक्टर की जानकारी QR कोड के जरिए उपलब्ध करानी होगी।
यह QR कोड डॉक्टरों के पंजीकरण बोर्ड से लिंक होंगे। लाइसेंस का हर पांच साल में नवीनीकरण होने पर जानकारी भी अपने आप अपडेट हो जाएगी।
MMC के प्रशासक विंकी रुघवानी ने बताया कि पिछले साल डॉक्टरों को इस व्यवस्था का पालन करने की सलाह दी गई थी, लेकिन प्रतिक्रिया बेहद कम रही। उन्होंने कहा कि MMC में पंजीकृत करीब 1.43 लाख डॉक्टरों में से केवल 20,000 डॉक्टरों ने इसके लिए आवेदन किया था। इसी वजह से अब QR कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
QR कोड पंजीकरण प्रमाणपत्र से अलग होगा और इसमें छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। आयुर्वेद और होम्योपैथी के डॉक्टर पिछले करीब डेढ़ साल से इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं। इसमें Certificate Course in Modern Pharmacology (CCMP) पूरा करने वाले डॉक्टरों की जानकारी भी शामिल होती है।
फर्जी और अयोग्य डॉक्टरों पर रोक लगाने के लिए यह कदम पिछले दो विधानसभा सत्रों में विधायकों द्वारा उठाई गई मांगों के बाद लागू किया गया है। विधायकों ने फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
डॉ. रुघवानी के अनुसार, महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है जहां डॉक्टरों के लिए QR कोड आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली अनिवार्य की गई है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल पर राष्ट्रीय स्तर पर भी विचार किया जा सकता है।
MMC को महाराष्ट्र में फर्जी डॉक्टरों के प्रैक्टिस करने से जुड़ी औसतन हर महीने एक शिकायत मिलती है। ऐसी शिकायतें संबंधित जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला एंटी-क्वैकरी कमेटियों के साथ-साथ पुलिस को भी भेजी जाती हैं।
