पुलिस बनकर आए लुटेरे, सोने के बिस्कुट का सौदा कर रहे ज्वेलर्स से 12 लाख रुपये लूटा

 

मुंबई के भांडुप में सस्ते दाम पर सोने की बिस्कुट दिलाने का झांसा देकर एक ज्वेलर को ठगने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सौदा तय होने के बाद आरोपियों ने पुलिस बनकर ज्वेलर और उसके साथियों पर हमला किया और 12 लाख रुपये नकद तथा उसकी पत्नी के नाम की बैंक चेकबुक लेकर फरार हो गए। भांडुप पुलिस ने इस मामले में कांतिलाल कोठारी, किसानलाल कोठारी और चार अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता 47 वर्षीय धर्मेंद्र मानसिंह पाटिल भांडुप पश्चिम में ज्वेलरी का कारोबार करते हैं। उनकी पहचान शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वाले 47 वर्षीय गोपाल शंकर पावसकर के जरिए कांतिलाल कोठारी से हुई थी। 28 जून को गोपाल पावसकर ने धर्मेंद्र पाटिल को बताया कि कांतिलाल कोठारी बड़े पैमाने पर सोने के बिस्कुट का कारोबार करता है और बाजार भाव से कम कीमत पर सोना उपलब्ध करा सकता है।

धर्मेंद्र पाटिल इस प्रस्ताव पर राजी हो गए। इसके बाद कांतिलाल कोठारी ने उन्हें अपने बेटे किसानलाल कोठारी से मिलवाया। दोनों पक्षों के बीच सोने की खरीद को लेकर बातचीत जारी रही। पुलिस के अनुसार, भांडुप पश्चिम के टेंभीपाड़ा रोड स्थित शिवाजीनगर इलाके में सौदे की शर्तें और साजिश तय की गई।

बातचीत के बाद धर्मेंद्र पाटिल ने 100-100 ग्राम के दो सोने के बिस्कुट 28 लाख रुपये में खरीदने पर सहमति जताई। आरोपियों ने आधी रकम ऑनलाइन और बाकी आधी नकद देने को कहा। 21 सितंबर को धर्मेंद्र पाटिल अपने भतीजों साई पाटिल और आयुष पाटिल तथा दोस्त गोपाल पावसकर के साथ नकदी लेकर भांडुप से निकले। आरोपियों ने उन्हें नवी मुंबई के ऐरोली इलाके में सेक्टर-9 स्थित गरम मसाला होटल के पास, ऐरोली-मुलुंड रोड पर मिलने के लिए बुलाया।

दोपहर करीब 1:30 बजे जब वे बताए गए स्थान पर पहुंचे, तो किसानलाल कोठारी ने फोन कर पूछा कि कार में कितने लोग आए हैं। इसके बाद उसने धर्मेंद्र पाटिल और गोपाल पावसकर को रुपये लेकर पैदल आगे आने के लिए कहा। धर्मेंद्र पाटिल की सड़क के एक मोड़ पर किसानलाल कोठारी से मुलाकात हुई, जहां उसने सोने के दो बिस्कुट दिखाए। बिस्कुट देखने के बाद धर्मेंद्र पाटिल वापस कार के पास गए और 12 लाख रुपये नकद लेकर आए। उन्होंने रकम गोपाल पावसकर को दी, जिसने पैसे गिनने के लिए आरोपियों को सौंप दिए।

जब धर्मेंद्र पाटिल ने पैसों की रसीद मांगी तो आरोपियों ने कहा कि अंतिम सौदा एक कार्यालय में पूरा किया जाएगा। इसी दौरान उनका ध्यान भटकाने की कोशिश की। आरोप है कि तभी तीन अज्ञात लोग एक अर्टिगा कार में वहां पहुंचे। उनके हाथों में पुलिसकर्मियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली फाइबर की लाठियों जैसी चीजें थीं। उन्होंने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और धर्मेंद्र पाटिल तथा सोने के बिस्कुट दिखाने वाले व्यक्ति के साथ मारपीट शुरू कर दी।

इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर आरोपियों ने 12 लाख रुपये नकद वाला बैग और धर्मेंद्र पाटिल की पत्नी के नाम की बैंक चेकबुक छीन ली। सोने के बिस्कुट दिखाने वाले व्यक्ति को भी जबरन अर्टिगा में बैठा लिया गया। इसके बाद आरोपी मुंबई की ओर फरार हो गए। धर्मेंद्र पाटिल के मुताबिक, पूरा घटनाक्रम कुछ ही सेकंड में हो गया और वह सकते में रह गए।

घटना के बाद धर्मेंद्र पाटिल ने कांतिलाल कोठारी और किसानलाल कोठारी को संदेश भेजकर पैसे लौटाने की मांग की और पुलिस से शिकायत करने की चेतावनी दी। आरोप है कि दोनों ने जवाब में उल्टा पूछा कि वह पुलिस स्टेशन क्यों गया और कहा कि पैसे पुलिस से ही ले ले। इसके बाद उन्होंने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए।

इसके बाद धर्मेंद्र पाटिल ने भांडुप पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कांतिलाल कोठारी, किसानलाल कोठारी, सोने के बिस्कुट दिखाने वाले अज्ञात व्यक्ति और उसके तीन अज्ञात साथियों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की साजिश, धोखाधड़ी, लूट समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की आगे जांच जारी है।

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