क्या CJP नेता सौरव दास उर्फ़ योगेश शर्मा नेपाली है, मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल !

 

मद्रास हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय सह-संयोजक सौरव दास की नागरिकता और उनके मूल की जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी समेत 10 अन्य पक्षों को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कांचीपुरम जिले के व्यवसायी गणेश कुमार ने यह जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को योगेश शर्मा उर्फ ​​सौरव दास तथा उनके माता-पिता की पृष्ठभूमि, नागरिकता और अन्य संबंधित जानकारियों की विस्तृत, गहन और निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया जाए।

याचिकाकर्ता का दावा है कि सौरव दास का मूल नेपाल से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने इस दावे की सत्यता की जांच कराने की मांग की है। गणेश कुमार का कहना है कि यदि यह बात सही साबित होती है, तो सौरव दास को भारत सरकार और देश की न्यायपालिका के बारे में उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सौरव दास न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष इस जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि जांच में सौरव दास दोषी पाए जाने पर उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने की कार्रवाई की जाए।

गणेश कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार मंत्रालय को निर्देश देने की मांग भी की है कि ‘सौरव दास’ नाम से संचालित ट्विटर और इंस्टाग्राम अकाउंट को ब्लॉक किया जाए। याचिका में कहा गया है कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक सौरव दास को न्यायपालिका के खिलाफ मानहानिकारक, धमकी भरी, अभद्र, अश्लील या अपमानजनक टिप्पणियां करने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। इस मांग में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतों के न्यायाधीशों के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां भी शामिल हैं।

याचिकाकर्ता चाहता है कि यह प्रतिबंध सोशल मीडिया समेत सभी मीडिया प्लेटफॉर्म पर लागू हो। इतना ही नहीं, सौरव दास खुद या अपने किसी दोस्त, सहयोगी, एजेंट अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से भी इस तरह की टिप्पणी न कर सकें। गणेश कुमार का आरोप है कि दास लगातार न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और ऐसा करना संविधान का अपमान है।

याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि सौरव दास के नेपाली मूल से जुड़े होने की जानकारी सही है, तो योगेश शर्मा ने अपनी वास्तविक पृष्ठभूमि छिपाकर धोखाधड़ी के जरिए भारत में आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट हासिल किए होंगे। गणेश कुमार के मुताबिक, ऐसे व्यक्ति को भारतीय न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्द कहने का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने इस पूरे मामले को राष्ट्रहित से जुड़ा बताते हुए सौरव दास के दस्तावेज हासिल करने के तरीके की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने की भी जरूरत बताई है कि उन्हें आर्थिक मदद कहां से मिल रही थी और उनके वित्तपोषण के स्रोत क्या थे।

गणेश कुमार ने यह सवाल भी उठाया है कि आखिर किस उद्देश्य से सौरव दास न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे थे। उन्होंने मांग की है कि उनकी फंडिंग से जुड़े बैंक खाते और उन स्रोतों की भी निश्चित रूप से जांच की जाए, जहां से उन्हें पैसा मिल रहा था, ताकि इस मामले में जवाबदेही तय की जा सके।

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