नाना पाटेकर रहा होगा अच्छा एक्टर, लेकिन आदमी के तौर पर बदतमीज़ था!

  अकेला किसी के मरने के बाद उसकी बुराइयों पर पर्दा डालना और सिर्फ़ तारीफ़ों के पुल बाँधना मुझे कभी सही नहीं लगा। नाना पाटेकर को लेकर मेरी अपनी यादें और अनुभव अच्छे नहीं रहे। लोग उन्हें महान अभिनेता कहें, मुझे ऐतराज़ नहीं, लेकिन मैं वही कहूँगा, जो मैंने महसूस किया। एक नए पत्रकार के तौर पर उनके व्यवहार ने मुझे आहत किया था। इसलिए उनके निधन पर मैं बनावटी तारीफ़ करने के बजाय अपनी कड़वी राय बेबाकी से रख रहा हूँ। बात वर्ष 1995-1996 की है। मैं ‘दो बजे…

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