महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को सतारा के पुलिस अधीक्षक (SP) तुषार दोशी को हाल ही में हुए सतारा जिला परिषद (जेडपी) अध्यक्ष चुनाव के दौरान पुलिस के कथित दुराचार के आरोपों की जांच लंबित रहने तक अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया। अंतरिम व्यवस्था के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वैशाली कडुकर को जिला पुलिस प्रशासन का अस्थायी प्रभार दिया गया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यह चुनाव जीत लिया, जबकि शिवसेना–राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) गठबंधन के पास सदस्यों की संख्या अधिक थी। कुछ सदस्यों ने क्रॉस-वोटिंग की, और दो NCP सदस्यों को मतदान के लिए जाते समय अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन के घटक दलों ने स्थानीय चुनाव अलग-अलग लड़ा था।
पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने “लोकतंत्र की हत्या” पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था। उन्होंने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और कहा कि वह इन घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी थे। एकनाथ शिंदे ने बताया कि उन्होंने सभी पार्षदों को मतदान सुनिश्चित कराने के लिए तुषार दोशी और महाराष्ट्र पुलिस प्रमुख सदानंद दाते से संपर्क किया था। उन्होंने यह भी कहा कि आश्वासन के बावजूद दो NCP सदस्यों को मतदान करने से रोका गया।
एकनाथ शिंदे ने शिवसेना मंत्री शंभूराज देसाई का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव से एक दिन पहले NCP सदस्यों के खिलाफ पांच से दस साल पुराने मामलों में कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने तुषार दोशी और सदानंद दाते से अनुरोध किया था कि पहले NCP सदस्यों को मतदान करने दिया जाए और उसके बाद कोई भी कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि किसी को भी उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। “किसी व्यक्ति को मतदान से रोकना अपराध है और यह लोकतंत्र की हत्या के समान है।”
एकनाथ शिंदे ने कहा कि- तुषार दोशी और सदानंद दाते ने अलग-अलग बातचीत में उन्हें आश्वासन दिया था कि NCP सदस्यों को मतदान करने दिया जाएगा। लेकिन पुलिस ने उन्हें मतदान केंद्र के बाहर से ही हिरासत में ले लिया, जबकि वहां मौजूद हमारे मंत्रियों और विधायकों ने इसका विरोध किया।
65 सदस्यीय निकाय में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 35 सीटें होने के बावजूद BJP ने अप्रत्याशित जीत हासिल की। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि अंतिम समय में हुई राजनीतिक जोड़तोड़ और मतदान के दौरान पुलिस की कथित भूमिका ने परिणाम को प्रभावित किया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब मतदान क्षेत्र के भीतर महाराष्ट्र के मंत्री शंभूराज देसाई और NCP नेता व मंत्री मकरंद पाटिल के बीच कथित रूप से हाथापाई हो गई।
तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शंभूराज देसाई ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए और पक्षपात व दुराचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही आधिकारिक चुनाव प्रक्रिया के दौरान ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़े, तो प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
इन आरोपों को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो गृह विभाग भी संभालते हैं, ने इस पूरे प्रकरण की औपचारिक जांच के आदेश दिए। तत्काल प्रशासनिक कदम के रूप में, जांच पूरी होने तक तुषार दोशी को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया है।
