ठाणे सत्र न्यायालय ने वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने और यहां रहने के मामले में 50 वर्षीय महिला को दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने विदेशी अधिनियम की धारा 14ए के तहत लगाए गए आरोप से उसे बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष इस अपराध के लिए आवश्यक एक महत्वपूर्ण तत्व को साबित करने में विफल रहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी. एल. भोसले ने नूनाहर कमाल शेख को पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम, 1950 के नियम 6, पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 की धारा 3 के साथ पढ़े जाने पर तथा विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने दोनों अपराधों के लिए छह महीने और 27 दिन के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। चूंकि महिला 1 सितंबर 2018 से 28 मार्च 2019 तक पहले ही हिरासत में रह चुकी थी, इसलिए उसे दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 428 के तहत हिरासत की अवधि का लाभ दिया गया। अदालत ने दोनों अपराधों के लिए क्रमशः 500 रुपये और 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 31 अगस्त और 1 सितंबर 2018 की दरम्यानी रात विशेष अपराध शाखा ने मीरा रोड स्थित पेनकरपाड़ा झोपड़पट्टी में छापेमारी की थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। इसी कार्रवाई के दौरान नूनाहर कमाल शेख को पकड़ा गया।
पुलिस का आरोप था कि नूनाहर कमाल शेख ने खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया था और नोटिस दिए जाने के बावजूद भारतीय नागरिकता साबित करने वाला कोई पासपोर्ट, वीजा या अन्य दस्तावेज पेश नहीं किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छापेमारी दल के सदस्यों और जांच अधिकारी समेत चार गवाहों से पूछताछ की। अदालत ने उनकी गवाही को सुसंगत और विश्वसनीय माना। अदालत ने कहा कि छापेमारी और आरोपी द्वारा वैध दस्तावेज पेश करने में विफल रहने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर गवाहों के बयान एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
CrPC की धारा 313 के तहत अपने बयान में नूनाहर कमाल शेख ने दावा किया कि उसके पास भारतीय नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज हैं और उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया गया है। सुनवाई के दौरान उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज पेश किए।
हालांकि, अदालत ने कहा कि ये दस्तावेज काफी देर से पेश किए गए और जांच के दौरान सात दिन का नोटिस दिए जाने के बावजूद इन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया था।
अदालत ने यह भी कहा कि विदेशी अधिनियम की धारा 9 के तहत यह साबित करने की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति पर होती है कि वह विदेशी नहीं है। अदालत के अनुसार, नूनाहर कमाल शेख इस जिम्मेदारी को पूरा करने में विफल रही।
हालांकि, अदालत ने विदेशी अधिनियम की धारा 14ए के तहत महिला को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान तभी लागू होता है, जब कोई विदेशी नागरिक कानून के तहत अधिसूचित संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करता है या वहां रहता है।
चूंकि अभियोजन पक्ष कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि मीरा रोड की पेनकरपाड़ा झोपड़पट्टी को कानून के तहत प्रतिबंधित या निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया था, इसलिए धारा 14ए लागू करने के लिए आवश्यक शर्त पूरी नहीं हुई।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई का निर्देश देते हुए ठाणे के पुलिस आयुक्त को आदेश दिया कि महिला की सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश दूतावास के माध्यम से बांग्लादेश निर्वासित किया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, इस संबंध में अदालत में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया।
