कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बड़ी फूट पड़ गई है और मूल आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अलग राह अपना ली है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अब पूरी तरह अरविंद केजरीवाल की पार्टी बन गई है, ऐसा गंभीर आरोप लगाते हुए मनीष ब्रह्मभट्ट नामक युवक ने गुरुवार (3 सितंबर, 2026) को ‘कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक’ (CJP Democratic) के गठन की आधिकारिक घोषणा की।
अहमदाबाद निवासी मनीष ब्रह्मभट्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने दावा किया कि CJP आंदोलन के बाद सब कुछ बिक गया और यह केवल ‘टीम केजरीवाल’ बनकर रह गई है। साथ ही मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि अभिजीत दीपके ने अपनी टीम में अपने दोस्तों और महिला मित्रों को भर लिया है।
अभिजीत दीपके पर सीधे निशाना साधते हुए मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा- अभिजीत दीपके ने घर बैठे 12 लोगों की टीम तैयार कर ली। इसके लिए किसी भी मूल कार्यकर्ता या आंदोलन से जुड़े लोगों को नहीं बुलाया। इन पदों के लिए क्या मानदंड तय किए गए थे? उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े आठ लोगों, अपनी महिला मित्रों और कॉलेज के दोस्तों को इसमें शामिल किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हम प्रत्येक राज्य से 5 प्रतिनिधि चाहते थे, ताकि कोई भी तानाशाह या ‘राजा’ बनकर फैसले न ले सके। लेकिन इस मांग को खारिज कर मनमाना कामकाज शुरू कर दिया गया।
अरविंद केजरीवाल पर जोरदार हमला बोलते हुए मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा- इस टीम को बनाने का मूल विचार अरविंद केजरीवाल का ही था। वे शुरुआत से ही धोखा देते आए हैं। जब अन्ना हजारे का आंदोलन शुरू हुआ, तब उन्होंने अन्ना का इस्तेमाल करके अपना राजनीतिक फायदा उठाया।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने आगे कहा- अरविन्द केजरीवाल ने पार्टी बनाते समय दावा किया था कि जनता जिसे कहेगी, उसे टिकट दिया जाएगा और स्वराज लाया जाएगा। लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने स्वराज कानून को किनारे कर दिया। अब एक बार फिर खड़ा किया गया आंदोलन सफल होने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने अभिजीत दीपके के साथ डील करके इस आंदोलन को हाईजैक कर लिया है।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि AAP के लोगों को CJP पार्टी में शामिल करने के लिए ही सभी समझौते किए गए। CJP की नई कार्यकारिणी में एक भी मुस्लिम पुरुष या सिख प्रतिनिधि को जगह नहीं दी गई है। उन्होंने CJP के इस रुख पर तीखी नाराजगी जताई। उनका दावा है कि इन्हीं कारणों से उन्हें अलग पार्टी का गठन करना पड़ा।
