बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व मेयर विशाखा राउत की जाति प्रमाण पत्र अयोग्यता याचिका ख़ारिज की

 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को शिवसेना (UBT) की नगरसेविका और मुंबई की पूर्व मेयर विशाखा राउत की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कथित रूप से अमान्य जाति प्रमाणपत्र के आधार पर अपनी अयोग्यता को चुनौती दी थी। इस फैसले के बाद शिवसेना की प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी प्रिया सरवणकर के लिए हाई-प्रोफाइल वार्ड 191 पर दावा करने का रास्ता साफ हो गया है। इस वार्ड में शिवाजी पार्क और दादर पश्चिम का इलाका शामिल है।

प्रिया सरवणकर की शिकायत के बाद जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने पिछले महीने विशाखा राउत का अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाणपत्र अमान्य कर दिया था। समिति ने कहा था कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी के पास ऐसा करने का अधिकार क्षेत्र नहीं था। OBC महिलाओं के लिए आरक्षित इस वार्ड के नगर निकाय चुनाव में विशाखा राउत ने प्रिया सरवणकर को महज 191 वोटों से हराया था।

इसके बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) आयुक्त अश्विनी भिड़े ने विशाखा राउत को पद से हटाने का आदेश जारी किया और महाराष्ट्र सरकार से राजपत्र अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया, जिसमें उन्हें छह साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जाए।

विशाखा राउत ने अदालत में अयोग्यता की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें जाति जांच समिति के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 90 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। उन्होंने BMC आयुक्त के अयोग्यता आदेश जारी करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया।

हालांकि, न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि उनके तर्क स्वीकार्य नहीं हैं। पीठ ने कहा, “जब किसी जाति प्रमाणपत्र को फर्जी घोषित कर दिया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के अयोग्य होने का कानूनी परिणाम स्वतः सामने आता है। इसलिए हमें इन आदेशों में कोई अवैधता नहीं मिलती… याचिका में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।”

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला शिवसेना (UBT) की उपनेता और पूर्व विधायक विशाखा राउत के लिए झटका है। उन्हें ठाकरे परिवार के करीबी नेताओं में माना जाता है।

प्रिया सरवणकर ने कहा, “विशाखा राउत का जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित किया गया था। BMC उनके चुनाव को शून्य और अमान्य घोषित करने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। उन्होंने राहत की मांग की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि BMC की कार्रवाई उचित है और शहरी विकास विभाग अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “BMC का नियम है कि यदि किसी नगरसेवक का चुनाव अमान्य घोषित कर दिया जाता है तो उपविजेता नगरसेवक बन सकता है। मैं 191 वोटों से हारी थी, इसलिए अब मैं नगरसेवक बनूंगी।”

हालांकि, जाति जांच समिति के आदेश के खिलाफ विशाखा राउत की अपील अभी भी कोंकण संभागीय आयुक्त के समक्ष लंबित है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इन्कार करते हुए कहा कि विशाखा राउत संभागीय आयुक्त के समक्ष मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध कर सकती हैं।

विशाखा राउत ने कहा, “मैंने बॉम्बे हाईकोर्ट से BMC आयुक्त के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसके तहत मुझे अयोग्य घोषित किया गया था। अदालत ने मेरी याचिका खारिज कर दी। अब मैं कोंकण संभागीय आयुक्त द्वारा मेरी राहत संबंधी अपील पर जल्द सुनवाई किए जाने का इंतजार कर रही हूं।”

सरवणकर और राउत परिवार दादर-माहिम इलाके में लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। प्रिया सरवणकर के पिता सदा सरवणकर माहिम विधानसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) के उम्मीदवार महेश सावंत से हार गए थे। इसके बाद उनके बेटे समाधान और बेटी प्रिया भी दादर से नगर निकाय चुनाव हार गए थे।

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