मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने ड्यूटी के दौरान असाधारण साहस और वीरता का प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री वीरता पदक’ शुरू करने को मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। पुरस्कार पाने वाले पुलिसकर्मियों को पदक, प्रशस्ति-पत्र और 50 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। यह पुरस्कार हर वर्ष महाराष्ट्र दिवस की पूर्व संध्या यानी 30 अप्रैल को घोषित किए जाएंगे।
हर वर्ष पदकों की संख्या निर्धारित नहीं होगी। मैदानी स्तर पर सामने आने वाली वीरता की घटनाओं की रिपोर्ट और पुलिस बल की विभिन्न इकाइयों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर पुरस्कारों की संख्या तय की जाएगी।
महाराष्ट्र पुलिस के जवान, विशेष रूप से माओवादी प्रभावित गढ़चिरौली और गोंदिया जिलों में तैनात पुलिसकर्मी, माओवाद, आतंकवाद, सांप्रदायिक हिंसा, संगठित अपराध और तस्करी से निपटने के दौरान लगातार जोखिम का सामना करते हैं। इसके अलावा वे आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का भी सामना करते हैं।
सरकार के अनुसार पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, मेघालय, मणिपुर और केरल सहित कई राज्यों में उत्कृष्ट पुलिस सेवा और वीरता को सम्मानित करने के लिए ऐसे पुरस्कार दिए जाते हैं। महाराष्ट्र में भी इसी तर्ज पर यह नया पुरस्कार शुरू किया गया है।
पदक के चयन के लिए तीन स्तरीय प्रक्रिया को मंजूरी दी गई है। प्रथम स्तर की समिति की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक (DGP) करेंगे। जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक संबंधित विशेष पुलिस महानिरीक्षक के माध्यम से प्रस्ताव भेजेंगे, जबकि पुलिस आयुक्त अपने प्रस्ताव DGP को भेजेंगे।
सरकार के स्तर पर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति प्रस्तावों की जांच करेगी। इसके बाद प्रस्ताव अंतिम विचार के लिए गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष रखे जाएंगे।
यह पुरस्कार मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकेगा। मंत्रिमंडल ने इस योजना के तहत चयन प्रक्रिया, समितियों की संरचना और खर्च से संबंधित प्रावधानों को भी मंजूरी दे दी है।
