मुंबई की विशेष CBI अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के कथित करीबी संदीप मिस्त्री की जमानत याचिका खारिज कर दी है। संदीप मिस्त्री पर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े 6,498 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने का आरोप है। अदालत ने जमानत देने से इन्कार करते हुए कहा कि संदीप मिस्त्री ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट किए, दुबई और हांगकांग में फर्जी कंपनियां संचालित कीं और नीरव मोदी के लिए चार मिलियन संयुक्त अरब अमीरात दिरहम (UAE दिरहम) की रकम संभाली।
विशेष न्यायाधीश एस. के. करहाले ने गुरुवार को कहा कि संदीप मिस्त्री का लंबे समय तक भारत से बाहर रहना, अपराध में उसकी कथित भूमिका और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका उसकी रिहाई के खिलाफ जाती है। संदीप मिस्त्री को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हिरासत में लिए जाने के बाद भारत लाया गया था। 29 सितंबर को मुंबई हवाई अड्डे पर उसे गिरफ्तार किया गया।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाह आशीष कुमार लाड के बयान पर भरोसा किया। आशीष लाड ने बताया था कि उसने एक अन्य आरोपी मिहिर भंसाली और कुछ अन्य लोगों के निर्देश पर दुबई स्थित समूह की 13 कंपनियों के खातों से लगभग चार मिलियन UAE दिरहम नकद निकाले थे। आरोप है कि यह रकम 12 दिनों तक आशीष लाड के पास रही। इसके बाद उसने दुबई एयरपोर्ट फ्री जोन में संदीप मिस्त्री को यह रकम सौंप दी। संदीप मिस्त्री ने कथित तौर पर आशीष लाड से कहा था कि वह यह पैसा नीरव मोदी को देगा।
अदालत ने कहा कि संदीप मिस्त्री ने दुबई और हांगकांग में फर्जी कंपनियों का संचालन किया। उस पर हीरे, सोने और मोतियों के आभूषणों के काल्पनिक कारोबार को वास्तविक दिखाने के लिए आयात-निर्यात के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में समन्वय करने का भी आरोप है। इसके अलावा, वह ‘पैनेमेल’ और ‘क्रिकइन्फो’ नामक संचार प्रणालियों के जरिए निर्देश देता था। इन प्रणालियों को इस तरह तैयार किया गया था कि संदेश अपने आप डिलीट हो जाते थे।
अदालत ने इन आरोपों का भी उल्लेख किया कि मामला दर्ज होने के बाद संदीप मिस्त्री ने फर्जी कंपनियों के निदेशकों को बदलने में मदद की और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट किए गए। आदेश के अनुसार, दुबई स्थित वर्ल्ड डायमंड डिस्ट्रीब्यूशन एफजेडई के कार्यालय को खाली करने से पहले वहां से लेखांकन और कारोबारी गतिविधियों से संबंधित डेटा वाला सर्वर हटा दिया गया था। इसके बाद नीरव मोदी के भाई निहाल मोदी ने उसकी हार्ड डिस्क नष्ट करने के लिए सौंप दी थी।
संदीप मिस्त्री के वकील ने जमानत के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि संदीप मिस्त्री का पासपोर्ट रद्द किया जा चुका है और भारत लौटने वाले अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने इस बात पर भी जोर दिया कि गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मिस्त्री की हिरासत नहीं मांगी थी।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि नोटिस जारी होने और मार्च 2021 में गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बावजूद संदीप मिस्त्री जांच और कानूनी कार्यवाही से बचता रहा। अभियोजन के मुताबिक, उसके दोबारा फरार होने की आशंका है, क्योंकि उसकी पत्नी और बच्चा दुबई में रहते हैं। यह भी दलील दी गई कि मामले में संदीप मिस्त्री की भूमिका अन्य आरोपियों से अलग है।
जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि संदीप मिस्त्री की भारत वापसी दबावपूर्ण कानूनी कार्यवाही के जरिए सुनिश्चित की गई थी। अदालत ने कहा, “इस प्रकार, इस मामले में आवेदक की उपस्थिति बाध्यकारी परिस्थितियों के कारण सुनिश्चित हुई है।” न्यायाधीश ने आगे कहा कि यदि उसे रिहा किया गया, तो मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना मुश्किल होगा।
अदालत ने जमानत याचिका खारिज करने के लिए साक्ष्य नष्ट किए जाने और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को भी अहम आधार माना।
