शेयरों में हेराफेरी और निवेश धोखाधड़ी के मामले में छह शहरों के 29 ठिकानों पर ED की छापेमारी

 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को शेयरों में हेराफेरी और निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत छह शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की। यह मामला शेयर बाजार में सूचीबद्ध दो कंपनियों- आरएम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और आरएंडबी डेनिम्स लिमिटेड से जुड़ा है। ED के मुंबई जोनल कार्यालय-I ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यह कार्रवाई की।

जांच का मुख्य केंद्र शेयर बाजार में अपनाई गई ‘पंप एंड डंप’ की रणनीति है। इस तरीके में समन्वित कारोबार, कॉरपोरेट गतिविधियों और प्रचार अभियानों के जरिए किसी शेयर की कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती है। इसके बाद शेयरों को बढ़ी हुई कीमत पर बेच दिया जाता है।

मौजूदा मामले में ED उन आरोपों की जांच कर रहा है, जिनके मुताबिक चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को तरजीही आधार पर शेयर और परिवर्तनीय वारंट आवंटित किए गए। इसके बाद इन शेयरों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई और खुदरा निवेशकों को आकर्षित करने के लिए व्हाट्सऐप पर प्रचार अभियान चलाया गया। ED के अनुसार, बाद में दोनों कंपनियों के शेयरों की कीमतें बुरी तरह गिर गईं, जिससे एक लाख से अधिक छोटे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

छापेमारी मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में की गई। इस दौरान दोनों कंपनियों के कार्यालयों, उनके प्रमोटरों के आवासों और कथित तौर पर तरजीही कीमतों पर शेयर पाने वाले व्यक्तियों के ठिकानों की तलाशी ली गई। इसके अलावा स्टॉक ब्रोकिंग और वित्तीय कंपनियों तथा उन लोगों से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई, जिन पर शेयरों का प्रचार करने और खुदरा निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कथित तौर पर व्हाट्सऐप ग्रुप चलाने का संदेह है।

ED की जांच के मुताबिक, दोनों कंपनियों ने अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और परिवर्तनीय वारंट जारी किए। इन प्रतिभूतियों की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर आपस में निकट संबंध रखने वाले कुछ व्यक्तियों, कंपनियों और कर्जदाताओं के नेटवर्क से आया था।

ED ने पाया कि इसके बाद के महीनों में दोनों शेयरों की बाजार कीमतें बढ़ाई गईं, जबकि अधिकांश शेयर उन्हीं चुनिंदा धारकों के पास बने रहे। शेयरों का कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित होना, शेयर खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत और उसके बाद कीमतों में हुए उतार-चढ़ाव इस कथित हेराफेरी की जांच के प्रमुख पहलू हैं।

छापेमारी के दौरान ED ने कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, शेयरों के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्तियों से संबंधित कागजात जब्त किए। जांच एजेंसी को संदेह है कि ये दस्तावेज और उपकरण मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों से फरवरी 2026 के बीच व्हाट्सऐप पर कई ग्रुप और कम्युनिटी सक्रिय थे। इनमें ‘मल्टीबैगर स्टॉक्स’ नाम का ग्रुप भी शामिल था, जहां दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने की रोजाना सिफारिशें प्रसारित की जाती थीं। आरोप है कि इस प्रचार अभियान के जरिए खुदरा निवेशकों को इन शेयरों में निवेश के लिए आकर्षित किया गया, जिससे इन्हें खरीदने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ।

ED के अनुसार, व्हाट्सऐप ग्रुप चलाने के लिए इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड हरियाणा और मुंबई के अन्य व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत पाए गए लेकिन इनका संचालन गुजरात के भावनगर से किया जा रहा था। शेयर खरीदने की सिफारिशें प्रसारित होने के बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में खरीदारों की संख्या लगभग 3,400 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई।

25 फरवरी 2026 को आरोपियों द्वारा बनाए गए व्हाट्सऐप ग्रुप अचानक डिलीट कर दिए गए। इसके बाद दोनों कंपनियों के शेयरों की कीमतें लोअर सर्किट पर पहुंच गईं और कुछ ही दिनों में उनके बाजार मूल्य में करीब 70 प्रतिशत की गिरावट आ गई।

ED की जांच के मुताबिक, शेयरों की कीमतों में आई इस तेज गिरावट से एक लाख से अधिक खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। इनमें से कई निवेशक कीमतों में अचानक आई गिरावट के बीच अपने शेयर बेचने में भी असमर्थ रहे।

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