उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में 13 बार दर्ज मिला है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मामले में दोषी पाए गए कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची के काम से तत्काल हटाने और उनकी सेवाएं समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिम्मेदार तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
निर्वाचन विभाग की जांच में सामने आया कि विधानसभा क्षेत्र 347-आजमगढ़ की मतदाता सूची में हिंदी में ‘विकास यादव’ नाम 13 बार दर्ज था। इनमें से दो नाम पहले ही हटाए जा चुके थे, जबकि शेष 11 नाम अलग-अलग व्यक्तियों के हैं। इनमें एक मतदाता का नाम सही पाया गया है, जबकि अन्य 10 लोगों के नाम और विवरण में सुधार किया जाएगा।
जांच में लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए गए कंप्यूटर सहायक और पांच बीएलओ को मतदाता सूची के काम से तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी सेवाएं समाप्त करने के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी है। कंप्यूटर सहायक, बीएलओ, तत्कालीन ईआरओ और दो एईआरओ को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई से पहले नोटिस देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस मामले में विधानसभा क्षेत्र 347-आजमगढ़ के कंप्यूटर सहायक संजय कुमार प्रजापति और पांच बीएलओ को जिम्मेदार पाया गया है। इनमें गीता देवी प्रथम, गीता देवी द्वितीय, सुनीता देवी और शीला देवी (चारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) तथा उमेश कुमार यादव (रोजगार सेवक) शामिल हैं।
मतदाता सूची तैयार करने और उसके पर्यवेक्षण में लापरवाही के मामले में तत्कालीन सदर एसडीएम एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी नरेंद्र गंगवार तथा दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें डॉ. मोनिका अग्रवाल (आयुर्वेदिक चिकित्सक) और तत्कालीन नायब तहसीलदार सदर माधवेंद्र प्रताप सिंह शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जिला निर्वाचन अधिकारी, आजमगढ़ को जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में इस तरह की गड़बड़ियों की गहन जांच कराने और एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
