एक निजी संगठन ‘प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन’ ने एक बयान में बताया कि शिवसेना के श्रीकांत एकनाथ शिंदे (महाराष्ट्र), भाजपा के जगदंबिका पाल (उत्तर प्रदेश), पीपी चौधरी (राजस्थान) और निशिकांत दुबे (झारखंड) पुरस्कारों के लिए व्यक्तिगत श्रेणी में चुने गए सांसदों में शामिल हैं। इन्हें साल 2026 के संसद रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया है।
संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत साल 2010 में हुई थी और यह पुरस्कार उन सांसदों को दिए जाते हैं जो पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए संसद में खासे एक्टिव रहते हैं। इसका मकसद सांसदों को प्रोत्साहित करना और जनता के बीच संसदीय कार्यवाही को लोकप्रिय बनाना है। ये पुरस्कार संसद में सक्रियता, बहस में भागीदारी, प्रश्न पूछने और विधायी कामकाज में योगदान के आधार पर प्राइम पॉइंट फाउंडेशन की तरफ से दिया जाता है।
प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन की ओर से जारी बयान के अनुसार प्रवीण पटेल (उत्तर प्रदेश), विद्युत बरन महतो (झारखंड), लुम्बाराम चौधरी (राजस्थान), हेमंत विष्णु सावरा (महाराष्ट्र), स्मिता उदय वाघ (महाराष्ट्र), नरेश गणपत म्हस्के (महाराष्ट्र), मेधा विश्राम कुलकर्णी (महाराष्ट्र) और नरहरि अमीन (गुजरात) को इस साल बजट सत्र के अंत तक संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा।
इसके अलावा इस सम्मान के लिए चार संसदीय समितियों को भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनमें चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता वाली कृषि समिति, भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली वित्त समिति, सप्तगिरि शंकर उलाका की अध्यक्षता वाली ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज समिति और अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली कोयला एवं खान समिति शामिल हैं। इस साल चुने गए चेहरों में देश के कई बड़े और अनुभवी राजनेता शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय तक शासन व्यवस्था को करीब से देखा है।
बता दें कि इस गौरवशाली लिस्ट में शामिल जगदंबिका पाल और चरणजीत सिंह चन्नी पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इनके अलावा गुजरात से आने वाले नरहरि अमीन पूर्व उप मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
