रियल-मनी गेमिंग मामले में ED ने गेम्सक्राफ्ट की 1,906 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं

 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोबाइल ऐप के जरिए रियल-मनी गेमिंग, विशेष रूप से रमी से जुड़े मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत 1,906 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कुर्की बुधवार को जारी एक आदेश के माध्यम से की गई।

ED के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि कुर्क की गई संपत्तियां Gameskraft Technologies Private Limited, उसके शेयरधारकों और उससे जुड़ी संस्थाओं से संबंधित हैं। इन संपत्तियों में बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयर, एक फार्महाउस और कई आवासीय एवं वाणिज्यिक संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां कंपनी के शेयरधारकों, उनके परिवार के सदस्यों, निजी पारिवारिक ट्रस्टों और विभिन्न संबंधित संस्थाओं के नाम पर थीं।

ED ने दो कंपनियों—Gameskraft Technologies और RummyTime Technologies Private Limited—का नाम लिया है। आरोप है कि ये कंपनियां RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे मोबाइल ऐप के जरिए रियल-मनी गेमिंग का संचालन कर रही थीं। इन प्लेटफॉर्म्स का देशभर में करीब 3 करोड़ यूजर्स का आधार था, जिसमें महाराष्ट्र के यूजर्स भी शामिल थे। ये कंपनियां यूजर्स द्वारा जमा की गई दांव की रकम पर 10 से 15 प्रतिशत तक प्लेटफॉर्म कमीशन वसूलकर भारी राजस्व अर्जित करती थीं।

ED ने तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज धोखाधड़ी के कई FIR के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में यूजर्स ऐसे राज्यों में मौजूद थे, जहां ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग प्रतिबंधित थी। इनमें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।

ED की जांच में आगे पता चला कि यूजर्स को यह भरोसा दिलाया जाता था कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पारदर्शी, निष्पक्ष और ऑटोमेटेड प्लेयर्स/एल्गोरिदम (BOTs) से मुक्त हैं। हालांकि, आरोप है कि इन BOTs का इस्तेमाल भोले-भाले यूजर्स के खिलाफ उनकी जानकारी के बिना किया जाता था। कथित तौर पर BOTs के इस्तेमाल से यूजर्स को भारी आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों के लिए अपराध से अर्जित आय पैदा हुई।

जांच में यह भी सामने आया कि कंपनियों ने कथित तौर पर यूजर्स को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने के लिए भ्रामक और लत लगाने वाली रणनीतियां अपनाईं। नए यूजर्स को जोड़ने के लिए मार्केटिंग और प्रचार अभियानों पर कथित तौर पर 1,035 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए। यूजर्स को बोनस, रेफरल इंसेंटिव, मुफ्त टूर्नामेंट में प्रवेश और प्रचारात्मक पुरस्कारों के जरिए आकर्षित किया गया।

आरोप है कि आरोपियों ने पैसे निकालने के लिए प्रतिबंधात्मक प्रक्रियाएं भी लागू कीं। कुछ मामलों में 5 से 10 प्रतिशत तक निकासी शुल्क लगाया गया। इसके अलावा, ‘सुपर बूस्टर’ ऑफर के जरिए यूजर्स को अपनी निकासी योग्य रकम को गैर-निकासी योग्य ‘गेम कैश’ में बदलने के लिए प्रेरित किया गया। ऐसे निष्क्रिय यूजर्स को भी कथित तौर पर निशाना बनाया गया, जिन्होंने भारी आर्थिक नुकसान के बाद गेम खेलना बंद कर दिया था। उन्हें तत्काल कैश क्रेडिट और प्रचारात्मक ऑफर दिए गए।

अब तक, मामले में जांच के दौरान कुर्क, फ्रीज और जब्त की गई अपराध से अर्जित आय की कुल कीमत 2,401 करोड़ रुपये है।

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