अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने भंडारा, महाप्रसाद, इफ्तार पार्टी, लंगर जैसे सार्वजनिक भोजन के कार्यक्रमों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सार्वजनिक भोजन का आयोजन करने से सात दिन पहले अनुमति लेनी होगी। साथ ही भोजन के संबंध में कैटरर्स संचालक को पूरी जानकारी देनी होगी। कच्चा माल कहां से खरीदा गया है, इसकी जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।
“महाप्रसाद, इफ्तार पार्टी, अन्नछत्र, भंडारा और लंगर के संबंध में हमने एक प्रारूप तैयार किया है। कार्यक्रम होने से 7 दिन पहले संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी देनी होगी। इसके बाद अधिकारी वहां जाकर निरीक्षण करेंगे। यही इसके पीछे की मंशा है,” तुकाराम मुंढे ने बताया।
तुकाराम मुंढे ने इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि जहां बड़े पैमाने पर भोजन तैयार किया जा रहा है और उसे बेचा या किसी को खाने के लिए दिया जा रहा है, वहां लोगों पर अनावश्यक पाबंदियां लगाने के बजाय सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
तुकाराम मुंढे ने कहा- भारत में त्योहारों और समारोहों की संख्या अधिक है। इसलिए इस अवधि में मिलावट की मात्रा भी बढ़ सकती है। इसका असर उपभोक्ताओं पर होता है। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी एक्ट के अनुसार, जो खाद्य पदार्थ हाई-रिस्क हैं, उन पर हम विशेष प्रतिबंध लगा सकते हैं। ‘स्टैंडिंग ऑर्डर्स फॉर ऑल फेस्टिवल’ के तहत सभी त्योहारों के लिए पूरे साल स्थायी आदेश लागू रहेंगे। आगे से अलग-अलग आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसका वर्गीकरण तीन स्तरों में किया गया है—पहला राज्यव्यापी, दूसरा क्षेत्रीय और तीसरा स्थानीय स्तर का होगा। यह पूरी कार्रवाई चार चरणों में की जाएगी। कार्रवाई त्योहार से 21 दिन पहले शुरू होगी और त्योहार समाप्त होने के बाद भी 30 दिनों तक जारी रहेगी।”
तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया- महाप्रसाद या भंडारे के स्थानों पर भी जाकर जांच की जाएगी। यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित त्योहार के 14 दिन बाद भी मामला दर्ज करना आवश्यक हुआ तो मामला दर्ज किया जाएगा। हम जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं।
तुकाराम मुंढे ने कहा- मिठाई, खोया, पनीर, घी, सूखे मेवे, मटन, चिकन जैसे खाद्य पदार्थों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसका परिणाम मिलावट या असुरक्षित उत्पाद के रूप में सामने आ सकता है। इस पृष्ठभूमि में पूरे साल का कैलेंडर तैयार किया गया है। यह सभी त्योहारों, यात्राओं और उरूस के लिए होगा और सभी धर्मों के लोगों पर लागू होगा। क्रिसमस, ईद, दिवाली जैसे सभी त्योहार इसमें शामिल होंगे। यह धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था होगी। किस त्योहार में कौन-से उत्पाद खाए या बेचे जाते हैं, उसके आधार पर उन्हें हाई-रिस्क श्रेणी में रखा जाएगा।
तुकाराम मुंढे ने कहा- गणेशोत्सव, नवरात्रि, दिवाली, ईद, क्रिसमस और नववर्ष की पूर्व संध्या पहली श्रेणी में होंगे। मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि, होली, गुड़ी पड़वा, आषाढ़ी और कार्तिकी वारी, श्रावण मास, जन्माष्टमी-दहीहंडी, कोजागिरी पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती दूसरी श्रेणी में होंगे। यदि मेले, पालखी समारोह या उरूस जैसे आयोजन हैं, तो वे स्थानीय स्तर की श्रेणी में होंगे। इन सभी पर चार चरणों में कार्रवाई की जाएगी।
रमजान और ईद के दौरान भी जांच की जाएगी। फलों को पकाने के मामले में अक्षय तृतीया के दौरान जांच की जाएगी। क्रिसमस के समय बेकरी उत्पादों पर विशेष नजर रखी जाएगी। बर्फ और पैक बंद पानी की भी जांच की जाएगी- ऐसा तुकाराम मुंढे ने बताया।
