गरवारे इंस्टीट्यूट के 81 वर्षीय पूर्व निदेशक डॉ. अरुण नारायण क्षीरसागर के केनरा बैंक खाते से 2.58 लाख रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने गूगल पर सर्च करने के दौरान Justdial वेबसाइट पर मिले आधार हेल्पलाइन के एक फर्जी नंबर पर संपर्क किया था।
भोईवाड़ा पुलिस ने इस साइबर धोखाधड़ी के मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
FIR के अनुसार, डॉ. अरुण नारायण क्षीरसागर अपने परिवार के साथ परेल गांव स्थित डॉ. वालिम्बे रोड पर रहते हैं। उनका केनरा बैंक की परेल शाखा में बचत खाता है। वह इस खाते से जुड़ा कोई UPI एप इस्तेमाल नहीं करते लेकिन नियमित रूप से इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा का उपयोग करते हैं।
3 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे डॉ. अरुण नारायण क्षीरसागर ने यह पता लगाने के लिए गूगल पर आधार हेल्पलाइन नंबर सर्च किया कि उनके आधार का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इस दौरान वह Justdial.com पर सूचीबद्ध एक वेबसाइट पर पहुंचे, जहां उन्हें ‘आधार हेल्प सेंटर’ नाम का एक पेज दिखाई दिया।
उन्होंने पेज पर दिए गए ‘कॉल नाउ’ लिंक पर क्लिक किया और वहां प्रदर्शित मोबाइल नंबर पर फोन किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने उनसे उनका नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल पता पूछा। इसके बाद फोन करने वाले ने हेल्पलाइन शुल्क के रूप में ऑनलाइन पांच रुपये जमा करने को कहा। डॉ. अरुण नारायण क्षीरसागर ने पैसे देने से इन्कार कर दिया और फोन काट दिया।
कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल फोन पर नौ SMS आए, जिनमें से कई में कथित तौर पर वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) थे। इसके बाद केनरा बैंक की ओर से उन्हें एक संदेश मिला, जिसमें बताया गया था कि उनके खाते से 1.14 रुपये डेबिट हुए हैं।
कुछ गड़बड़ी होने का संदेह होने पर डॉ. अरुण नारायण क्षीरसागर ने तुरंत बैंक के मैनेजर देवानंद पटेल से संपर्क किया और उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी। मैनेजर ने उन्हें इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड बदलने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने अपना पासवर्ड बदल लिया।
हालांकि, 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 12 बजे डॉ. अरुण नारायण क्षीरसागर को केनरा बैंक की ओर से सात और SMS मिले। इसके बाद जब उन्होंने अपने खाते की जांच की तो पता चला कि उनके खाते से कुल 2.58 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए थे। उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क कर अपना खाता ब्लॉक करने का अनुरोध किया। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई।
अपने मोबाइल फोन में आए SMS की जांच करने पर डॉ. अरुण नारायण क्षीरसागर को ऐसे संकेत मिले, जिनसे पता चला कि उनके फोन से की जाने वाली कॉल किसी दूसरे नंबर पर फॉरवर्ड की जा रही थीं। इसके बाद उन्होंने भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
