बिल्डर साझा टेरेस नहीं बेच सकते- कोर्ट

 

महाराष्ट्र राज्य सहकारी अपीलीय न्यायालय ने कहा है कि साझा जगहों पर अवैध कब्जे को संरक्षण देने या गैरकानूनी काम को जारी रखने के लिए न्यायिक कार्यवाही और निषेधाज्ञा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोहराया कि किसी संपत्ति पर अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति उसके वैध मालिक के खिलाफ संरक्षण की मांग नहीं कर सकता।

अदालत ने वर्ली स्थित शाह एंड नाहर इंडस्ट्रियल प्रिमाइसेस को-ऑपरेटिव सोसाइटी में एक औद्योगिक इकाई से लगे 2,360 वर्ग फुट के टेरेस को लेकर वर्ष 1999 से चल रहे विवाद में अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने सोसाइटी के पक्ष में फैसला सुनाया और अब्दुल कादर अब्दुल लतीफ तथा सुपारीवाला एक्सपोर्ट्स के टेरेस पर एकाधिकार के दावे को खारिज कर दिया।

37 पन्नों के आदेश में अदालत की सदस्य डॉ. सृष्टि नीलकंठ ने सहकारी न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि दावा करने वाले पक्ष टेरेस पर कानूनी रूप से स्वीकृत किसी विशेष अधिकार को साबित करने में विफल रहे।

अब्दुल कादर अब्दुल लतीफ ने दावा किया था कि उन्होंने वर्ष 1986 में गंगम्मा ट्रस्ट से 1,670 वर्ग फुट की औद्योगिक इकाई के साथ उससे सटा टेरेस भी खरीदा था। कथित तौर पर ट्रस्ट ने वर्ष 1985 में शाह एंड नाहर डेवलपर्स से दोनों संपत्तियां हासिल की थीं।

दावेदारों ने बिक्री समझौतों, पुष्टि-पत्र (डीड ऑफ कन्फर्मेशन) और रखरखाव शुल्क के बिलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि सोसाइटी ने वर्ष 1998 में टेरेस के लिए शुल्क लेना बंद करने से पहले करीब एक दशक तक उनसे इसका रखरखाव शुल्क वसूला था। उन्होंने आरोप लगाया कि जनवरी 1999 में सोसाइटी ने टेरेस में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की थी।

वहीं, सोसाइटी का कहना था कि टेरेस साझा संपत्ति है, जिसका इस्तेमाल आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने, आवागमन और उपयोगिता सेवाओं के रखरखाव के लिए आवश्यक है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई बिल्डर साझा जगहों पर किसी व्यक्ति को निजी अधिकार नहीं दे सकता। लंबे समय तक किसी जगह का इस्तेमाल करने या उसके रखरखाव का शुल्क चुकाने भर से उस पर मालिकाना हक साबित नहीं होता।

बॉम्बे हाई कोर्ट के रामगौरी केशवलाल विरानी बनाम ओवलकेश्वर त्रिवेणी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने दोहराया कि बिल्डर साझा सुविधाओं का हिस्सा बनने वाले टेरेस को निजी संपत्ति बताकर बेच नहीं सकते।

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