घाटकोपर के हिंदू सभा अस्पताल में अब ‘कमिंग सून’ घोटाला, सरकारी दस्तावेजों में भी गड़बड़ ही गड़बड़, 450 कर्मचारियों का भविष्य अभी अनिश्चित

 

मुंबई के घाटकोपर पश्चिम स्थित प्रसिद्ध हरिलाल जयचंद दोषी घाटकोपर हिंदू सभा अस्पताल के पुनर्निर्माण और दोबारा शुरू होने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के पूर्व कर्मचारी एवं वर्तमान में अधिवक्ता डॉ. वेदप्रकाश तिवारी द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जवाबों में अस्पताल की प्रस्तावित विकास प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

गौरतलब है कि अस्पताल प्रबंधन ने अप्रैल 2022 में इमारत की जर्जर स्थिति का हवाला देते हुए अस्पताल बंद कर दिया था। इसके चलते डॉक्टरों, नर्सों, आया-मौसियों, वार्ड बॉय और प्रशासनिक कर्मचारियों सहित लगभग 450 कर्मचारी बेरोजगार हो गए। सितंबर 2023 में अस्पताल की इमारत को ध्वस्त कर दिया गया। कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों के विरोध के बाद अस्पताल परिसर के बाहर ‘हिंदू सभा अस्पताल कमिंग सून’ के होर्डिंग लगाए गए थे।

BMC के जवाब में विकास अनुमति का अभाव

डॉ. वेदप्रकाश तिवारी के अनुसार, BMC भवन प्रस्ताव विभाग ने 23 सितंबर 2026 को दिए अपने जवाब में बताया है कि विकास से संबंधित फाइल वर्ष 2017 में वापस कर दी गई थी। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस भूखंड के लिए अब तक IOD, लेआउट मंजूरी, प्रथम Commencement Certificate, Occupancy Certificate अथवा अन्य विकास अनुमति जारी नहीं की गई है।

रेलवे की NOC भी जारी नहीं

सेंट्रल रेलवे ने 21 अक्टूबर 2026 को दिए जवाब में स्पष्ट किया है कि संबंधित स्थल के लिए रेलवे की ओर से कोई NOC जारी नहीं की गई है। डॉ. वेदप्रकाश तिवारी का कहना है कि अस्पताल का भूखंड रेलवे लाइन से 30 मीटर के भीतर होने के कारण रेलवे की अनुमति का मुद्दा महत्वपूर्ण है।

मृत ट्रस्टी के नाम पर एविएशन NOC का मामला

एविएशन विभाग ने 1 अक्टूबर 2026 के जवाब में बताया कि संबंधित स्थल के लिए NOC एक ट्रस्टी के नाम पर जारी की गई थी। डॉ. वेदप्रकाश तिवारी के अनुसार, संबंधित ट्रस्टी का लगभग दो वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। ऐसे में उस NOC की वर्तमान वैधता और उसके आधार पर प्रस्तावित विकास की स्थिति की जांच आवश्यक है।

स्क्रैप निस्तारण को लेकर उप धर्मादाय आयुक्त के न्यायालय में मामला लंबित

अस्पताल भवन के कथित रूप से बिना सार्वजनिक निविदा प्रक्रिया अपनाए ध्वस्तीकरण तथा स्क्रैप एवं मलबे के निस्तारण में धर्मादाय आयुक्त कार्यालय को विश्वास में नहीं लेने के आरोपों को लेकर डॉ. वेदप्रकाश तिवारी की शिकायत उप धर्मादाय आयुक्त के न्यायालय में लंबित है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित है।

डॉ. वेदप्रकाश तिवारी ने मांग की है कि अस्पताल ट्रस्ट के प्रशासनिक एवं वित्तीय कामकाज, भवन ध्वस्तीकरण, स्क्रैप बिक्री और अस्पताल के पुनर्निर्माण संबंधी दावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही ट्रस्ट से अस्पताल दोबारा शुरू करने की स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना मांगी जाए।

उन्होंने सवाल उठाया है कि जब विकास की बुनियादी अनुमतियां और रेलवे की NOC उपलब्ध नहीं हैं, तो अस्पताल ‘कमिंग सून’ के होर्डिंग किस आधार पर लगाए गए थे?
डॉ. वेदप्रकाश तिवारी ने कहा, “यह केवल एक इमारत का मामला नहीं है। यह हजारों मरीजों की स्वास्थ्य सुविधाओं और लगभग 450 कर्मचारियों के परिवारों की आजीविका से जुड़ा जनहित का विषय है। जनता को होर्डिंग नहीं, अस्पताल चाहिए और कर्मचारियों को आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए।”

Leave a Comment