सलवार उतारने की कोशिश और महिला के स्तन दबाना बलात्कार का प्रयास नहीं- पटना हाई कोर्ट

 

बिहार के पटना हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी महिला का सलवार उतारने की कोशिश करना और उसके स्तन दबाकर उसके साथ अश्लील हरकत करना, अपने आप में बलात्कार के प्रयास का अपराध साबित नहीं करता। अदालत ने कहा कि जब तक यौन संबंध बनाने की कोशिश या बलात्कार के इरादे को स्पष्ट रूप से साबित करने वाली कोई प्रत्यक्ष कार्रवाई सामने न आए, तब तक इसे बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता।

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के साथ धारा 511 के तहत आरोपी को दी गई सजा रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले में अधिकतम यह साबित होता है कि आरोपी ने महिला की लज्जा भंग (शीलभंग) करने का अपराध किया है, जो IPC की धारा 354 के अंतर्गत आता है।

यह आदेश न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह ने उस अपील पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें आरोपी ने सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा को चुनौती दी थी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा, “रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता ने पीड़िता को स्टूडियो में बंद किया, दरवाजा भीतर से बंद किया, उसका सलवार उतारने की कोशिश की और उसके स्तन दबाकर उसके साथ अश्लील हरकत की। इन कृत्यों से यह साबित होता है कि आरोपी ने यह जानते हुए या इस आशय से बल प्रयोग किया कि इससे महिला की लज्जा भंग होगी। इसलिए IPC की धारा 354 के तहत आवश्यक सभी तत्व इस मामले में मौजूद हैं।”

अदालत ने आगे कहा, “यदि FIR और पीड़िता की गवाही में लगाए गए सभी आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तब भी आरोपी की हरकतें IPC की धारा 376(1) के साथ धारा 511 के तहत दंडनीय बलात्कार के प्रयास का अपराध सिद्ध नहीं करतीं। अधिक से अधिक यह कहा जा सकता है कि आरोपी ने पीड़िता की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से कृत्य किया, जिस पर IPC की धारा 354 लागू होती है।”

सरकारी पक्ष के अनुसार, पीड़िता अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने के लिए आरोपी के स्टूडियो गई थी। आरोप है कि आरोपी ने पीड़िता के पिता को बाहर इंतजार करने के लिए कहा और कंप्यूटर पर फोटो दिखाने का बहाना बनाकर स्टूडियो का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद उसने पीड़िता का सलवार उतारने की कोशिश की और कथित रूप से बलात्कार करने के इरादे से उसके साथ छेड़छाड़ की। पीड़िता के शोर मचाने पर उसके पिता ने दरवाजा जोर लगाकर खोला, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि “रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे प्रवेश (Penetration) होने या बलात्कार का प्रयास किए जाने की स्पष्ट पुष्टि हो सके। साथ ही, इस संबंध में कोई चिकित्सीय (मेडिकल) प्रमाण भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए IPC की धारा 375 के आवश्यक तत्व इस मामले में सिद्ध नहीं होते और परिणामस्वरूप धारा 376 को धारा 511 के साथ पढ़ने का आधार भी नहीं बनता।”

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