‘महेश ट्यूटोरियल्स’ कोचिंग क्लास बंद, राज्य की 33 शाखाओं पर ताला

 

महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कोचिंग संस्था महेश ट्यूटोरियल्स (एम.टी. एज्युकेयर) ने बिना किसी पूर्व सूचना के राज्यभर की अपनी 33 शाखाओं का संचालन अचानक बंद कर दिया है। इस फैसले से हजारों छात्र, अभिभावक और शिक्षक असमंजस और चिंता में हैं।

जानकारी के अनुसार, महेश ट्यूटोरियल्स की मूल कंपनी एम.टी. एज्युकेयर लिमिटेड पिछले कुछ वर्षों से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है। कंपनी 16 दिसंबर 2022 से राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के आदेश के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है। 30 सितंबर 2025 को समाप्त दूसरी तिमाही और छमाही के वित्तीय परिणामों पर स्वतंत्र लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों, वित्तीय संस्थानों, कर्मचारियों, वैधानिक प्राधिकरणों और अन्य लेनदारों के दावे अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुए हैं। इसलिए कंपनी की वास्तविक देनदारियों का स्पष्ट आंकलन उपलब्ध नहीं है। कंपनी पर लगभग 74.29 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज और देनदारियां हैं। लगातार बढ़ते घाटे, नकारात्मक शुद्ध संपत्ति और चालू परिसंपत्तियों की तुलना में अधिक चालू देनदारियों के कारण कंपनी का भविष्य दिवाला प्रक्रिया के अंतिम परिणाम पर निर्भर बताया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, 7 जुलाई को शाखा प्रमुखों की बैठक में 10 जुलाई से सभी शाखाओं का संचालन बंद करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, इससे पहले ही 2026-27 शैक्षणिक सत्र की पूरी फीस अभिभावकों से वसूल ली गई थी। शाखाएं बंद करते समय न तो छात्रों के लिए किसी वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था की घोषणा की गई और न ही फीस वापसी को लेकर कोई स्पष्ट नीति बताई गई, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी है।

कुछ शाखाओं के छात्रों को इंटीग्रेटेड क्लास में शामिल होने का विकल्प दिया गया है। माटुंगा शाखा के कुछ अभिभावकों की बैठक में प्रबंधन ने कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब होने की जानकारी दी थी। इसके बाद कुछ दिनों तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गईं और फिर छात्रों को दूसरे इंटीग्रेटेड क्लास में प्रवेश लेने का विकल्प दिया गया। हालांकि, जब कई अभिभावकों ने फीस वापसी की मांग की, तो प्रबंधन ने आर्थिक असमर्थता जताई। इसके चलते अभिभावकों को मजबूरी में अपने बच्चों का दूसरे कोचिंग संस्थानों में दाखिला कराना पड़ा।

इस पूरे मामले को लेकर संस्कृति जीवन आधार फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रदीप मगरे ने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

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