उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। यह फैसला दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों के पाला बदलने को औपचारिक मंजूरी देता है।
यह निर्णय संसद के मानसून सत्र से कुछ दिन पहले आया है। भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार लोकसभा में अपना संख्या बल बढ़ाने का प्रयास कर रही है, ताकि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को पारित कराया जा सके।
इस मंजूरी के साथ लोकसभा में इन छह सांसदों को औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सदस्य के रूप में मान्यता मिल गई है। यह पार्टी में लंबे समय से चल रहे आंतरिक विभाजन के बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
यह फैसला उन छह सांसदों के उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) से अलग होकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने के करीब एक महीने बाद आया है। इसके साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
इसके अलावा, लोकसभा अध्यक्ष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) बनाने वाले 20 सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था को भी मंजूरी दे दी है। इससे सदन में इस समूह की अलग पहचान को औपचारिक मान्यता मिल गई है।
शिवसेना (UBT) के छह सांसद—मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटील, धाराशिव से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, परभणी से संजय जाधव, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे और हिंगोली से नागेश पाटील आष्टिकर—22 जून को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल हो गए थे।
लोकसभा अध्यक्ष का यह फैसला संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आया है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस फैसले से लोकसभा में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की स्थिति और मजबूत हुई है।
यह कदम एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच लंबे समय से जारी सत्ता संघर्ष में नवीनतम घटनाक्रम भी है। वर्ष 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद से दोनों गुट शिवसेना के नेतृत्व, संगठनात्मक नियंत्रण और चुनावी पहचान को लेकर कई राजनीतिक और कानूनी लड़ाइयों में उलझे हुए हैं।
