महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका द्वारा संचालित शास्त्रीनगर अस्पताल में 6 जुलाई को डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वाले नगरसेवक रमेश म्हात्रे को मुंबई हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। शनिवार को हुई विशेष सुनवाई में मुंबई हाईकोर्ट ने एक महिला डॉक्टर पर हमला करने और दो अन्य पुरुष डॉक्टरों के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार नगरसेवक रमेश म्हात्रे को कल्याण की अदालत द्वारा दी गई जमानत पर रोक लगा दी है। अदालत ने रमेश म्हात्रे को 19 जुलाई 2026 को शाम 5 बजे तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने डॉक्टरों से प्रस्तावित आंदोलन वापस लेने की अपील भी की है।
बता दें कि कल्याण की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा रमेश म्हात्रे को जमानत दिए जाने के आदेश का हाईकोर्ट ने आज स्वतः संज्ञान लिया। खास बात यह है कि रमेश म्हात्रे और उनके चार साथियों को जमानत मिलने के बाद महाराष्ट्र के डॉक्टरों ने 22 जुलाई को काम का बहिष्कार करने की घोषणा की थी। इन चारों साथियों पर भी डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप था।
मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम आंखड की खंडपीठ ने महाराष्ट्र में, विशेष रूप से महानगरपालिका और सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों द्वारा 22 जुलाई को हड़ताल पर जाने के फैसले का संज्ञान लिया। खंडपीठ ने रमेश म्हात्रे और उनके चार साथियों को दी गई जमानत रद्द करने के बाद डॉक्टरों से अपने आंदोलन के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
न्यायाधीशों ने कहा कि रमेश म्हात्रे को जमानत देने वाली मजिस्ट्रेट अदालत ने इस तथ्य पर उचित रूप से विचार नहीं किया कि उनके खिलाफ 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कुछ में हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं। खंडपीठ ने कहा, “भले ही वह 17 मामलों में बरी हो चुके हों, फिर भी अदालत को इस तथ्य पर विचार करना चाहिए था कि उनका नाम 18 मामलों में सामने आया था और इनमें से कुछ मामले बेहद गंभीर और जघन्य प्रकृति के थे।”
यह पूरी घटना 6 जुलाई को डोंबिवली स्थित KDMC द्वारा संचालित शास्त्रीनगर अस्पताल में हुई थी। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, घटना की शुरुआत तब हुई जब एक पुरुष और एक महिला डॉक्टर ने नवजात बच्चे के परिजनों को बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। अस्पताल में नवजात बच्चों के लिए बना नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) पूरी तरह से भरा हुआ था, इसलिए डॉक्टरों ने बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। डॉक्टरों ने कहा था कि नवजात बच्चे को उचित चिकित्सा देखभाल मिलना जरूरी है। इसके बाद परिजनों ने रमेश म्हात्रे से संपर्क किया और वह अपने सहयोगियों के साथ अस्पताल पहुंच गए।
एक वीडियो में नगरसेवक रमेश म्हात्रे और उनके समर्थक शुरुआत में डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों से बहस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद, एक महिला डॉक्टर के हाथ में मोबाइल फोन होने के दौरान नगरसेवक पीछे से उनके पास पहुंचे और उनके हाथ पर मार दिया, जिससे मोबाइल फोन नीचे गिर गया। इसके बाद उन्होंने दूसरे डॉक्टर और कर्मचारियों की ओर रुख किया और उन पर भी हमला किया।
