मंत्रालय में क्लर्क शुभम सिंह का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘इसीलिए’ उसका एक्सटेंशन चाहते हैं IAS डॉ. पी. अंबालागन

सेवाधारी शुभम सिंह

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) साल 2014 में ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा देकर देश में सत्ता में आयी थी। महाराष्ट्र में भी भाजपा की ही सरकार है। मुंबई मंत्रालय के उद्योग, ऊर्जा और श्रम विभाग का क्लर्क शुभम सिंह ‘सबका साथ- सबका विकास’ के नारे को अक्षरशः फॉलो करता है। वह उद्योगपतियों की फाइल 12 लाख रुपये रेट के हिसाब से क्लियर करता है। 8 लाख रुपये में से 2 लाख रुपये प्रधान सचिव को देता है। इसके बदले प्रधान सचिव उसको एक्सटेंशन दिलवा देते हैं।

शुभम सिंह का नाम अचानक मंत्रालय में चर्चा में इसलिए आ गया कि उद्योग, ऊर्जा और श्रम विभाग के प्रधान सचिव डॉ. पी. अंबालागन ने अतिरिक्त सचिव वी. राधा को पत्र लिखकर शुभम सिंह को सेवा विस्तार दिए जाने की सिफारिश की है। 4 मार्च 2026 को लिखे इस पत्र की प्रति ABI (abinewz.com के पास है।

शुभम सिंह प्रधान सचिव डॉ. पी. अंबालागन का निजी सचिव (PA) है। वह पिछले आठ साल से प्रधान सचिव के PA के पद पर खूंटा गाड़कर बैठा है। मंत्रालय के अधिकारी कर्मचारी उसका चेहरा देख-देख कर ऊब गए हैं।

परन्तु शुभम सिंह में एक खूबी भी है। वह ‘सब’ और ‘सबका’ काम ईमानदारी से करता है। शुभम सिंह ने अडानी, अम्बानी, बजाज, पवार, JSW, SKD, KINI आदि उद्योगपतियों की फाइल (ऑफर लेटर) के लिए 8 लाख रुपये रेट फिक्स कर दी है। 8 लाख रुपये मिलते ही यह सुमड़ी में इनकी फाइल क्लियर कर देता है। उस 8 लाख रुपये में से 2 लाख रुपये अपने बॉस IAS डॉ. पी. अंबालागन को देता है। 10-15 हजार कक्ष अधिकारी महेश बेडगे को देता है। बाकी खुद रख लेता है। 8 लाख रुपये प्रति फाइल के हिसाब से हिसाब करिये कि महीने में ऐसी 10 फाइलें शुभम सिंह क्लियर करता है। इसके पहले यही ‘सेवा’ वह IAS हर्षदीप कांबले को भी देता था।

बताते हैं कुछ उद्योगपतियों के ‘प्रतिनिधि’ जब इस विभाग में जाते हैं तो शुभम सिंह उनसे पूछता है कि आपको ‘डायरेक्ट’ करवाना है या उसकी ‘सेवा’ चाहिए। ‘डायरेक्ट’ कहने वालों की फाइल टेबल पर पड़ी-पड़ी धूल खाती है। यहाँ तक कि इरादा पत्र (लेटर ऑफ़ इंटेंट) भी देने के लिए चार्ज करता है। अगर कोई डायरेक्ट वाला प्रतिनिधि प्रधान सचिव डॉ. पी. अंबालागन से वन-टू-वन मिलना चाहता है तो उसके लिए भी शुभम सिंह 50,000 से 1,00,000 रुपये चार्ज करता है। इस चार्ज में सिर्फ वन-टू-वन मीटिंग करवाता है। काम होने की गारंटी शामिल नहीं है।

जब कोई शुभम सिंह से उसकी ‘सफलता’ का राज पूछता है तो वह बताता है कि उसके सिर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस का हाथ है। प्रधान सचिव डॉ. पी. अंबालागन से उसने सिर्फ फॉर्मलिटी के लिये एक्सटेंशन लेटर लिखवा दिया।

विशेष : प्रधान सचिव, IAS डॉ. पी. अंबालागन जब कहीं बाहरगांव जाते हैं तो फ्लाइट में उनके आसपास एक विशेष ‘शख्स’ की सीट बुक होती है। जब होटल में रुकते हैं तो उसी ‘शख्स’ का बगल में रूम बुक होता है। परन्तु मजबूरी में रेस्टोरेंट में एक ही टेबल पर उन्हें नाश्ता, लंच और डिनर करना पड़ता है। ये सब ‘सेवा’ भी शुभम सिंह प्रोवाइड करता है। इसलिए प्रधान सचिव डॉ. पी. अंबालागन ने उसके ‘सेवा विस्तार’ के लिए सिफारिशी पत्र लिख दिया है।

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