बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश- राजेश खन्ना के ‘आशीर्वाद’ बंगले को सोशल मीडिया पर ‘भूतिया’, ‘शापित’ या ‘अशुभ’ न लिखें

 

दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के कार्टर रोड, बांद्रा स्थित प्रसिद्ध ‘आशीर्वाद’ बंगले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया चैनलों को निर्देश दिया है कि इस बंगले को ‘भूतिया’, ‘शापित’ या ‘अशुभ’ बताकर किसी भी प्रकार का प्रचार-प्रसार न किया जाए। अदालत ने कहा कि इस तरह की सामग्री का प्रसारण मानहानिकारक है और यह मकान मालिक के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है। इसलिए न्यायालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को इस प्रकार की मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक दिया है।

यह आदेश बांद्रा के कार्टर रोड स्थित इस बंगले के वर्तमान मालिक एवं उद्योगपति शशि किरण शेट्टी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की एकलपीठ ने दिया। न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर ने कहा कि शशि किरण शेट्टी ने अंतरिम राहत पाने के लिए मजबूत आधार प्रस्तुत किया है और उनकी मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। न्यायालय ने यह भी माना कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री स्पष्ट रूप से मानहानिकारक है क्योंकि उसमें बंगले को भूतिया और कथित रूप से शापित बताया गया है।

न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर के अनुसार ऐसा करना याचिकाकर्ता शशि किरण शेट्टी के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है। इसलिए भविष्य में ऐसी टिप्पणियां या सामग्री प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए।

आज ‘आशीर्वाद’ के नाम से प्रसिद्ध यह बंगला शुरुआत में एक एंग्लो-इंडियन परिवार के स्वामित्व में था। 1950 के दशक में अभिनेता भारत भूषण ने इसे खरीदा। उस समय यह पहले से ही ‘भूत बंगला’ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि यह काफी पुराना था और कोई इसे खरीदने के लिए तैयार नहीं था।

भारत भूषण के यहां रहने के दौरान उन्हें ‘बैजू बावरा’ और ‘मिर्जा गालिब’ जैसी फिल्मों से बड़ी सफलता मिली। लेकिन कुछ वर्षों बाद उनकी फिल्में लगातार असफल होने लगीं। आर्थिक संकट और कर्ज के चलते उन्हें यह बंगला बेचना पड़ा। उन्होंने इसे उस समय मात्र 60 हजार रुपये में बेच दिया था।

साल 1960 में अभिनेता राजेंद्र कुमार ने यह बंगला खरीदा। उन्होंने शांति पूजा कराई और इसका नाम अपनी बेटी के नाम पर ‘डिंपल’ रखा। यहां रहने के दौरान उन्हें जबरदस्त सफलता मिली और वे ‘जुबली कुमार’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। हालांकि बाद में उनके करियर में भी गिरावट आई और उन्होंने भी यह बंगला बेच दिया।

साल 1969 में राजेश खन्ना ने यह बंगला मात्र 3.5 लाख रुपये में खरीदा और इसका नाम ‘आशीर्वाद’ रखा। यहां रहने के बाद वे बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार बने और लगातार 15-17 सुपरहिट फिल्में दीं। लेकिन 1970 के दशक के मध्य से उनके करियर और निजी जीवन में भी कठिन दौर शुरू हो गया। वर्ष 2012 में निधन तक वे इसी बंगले में अकेले रहे।

मनोरंजन जगत के कई बड़े कलाकारों के जीवन में अपार सफलता के बाद अचानक आई गिरावट के कारण लोगों ने इस बंगले को ‘शापित’ या ‘भूतिया’ कहना शुरू कर दिया। हालांकि वास्तव में इस स्थान पर कभी किसी भूत-प्रेत या अलौकिक घटना की पुष्टि नहीं हुई। कलाकारों के करियर से जुड़े महज संयोगों ने समय के साथ इस बंगले के बारे में कई लोककथाओं को जन्म दिया।

राजेश खन्ना के निधन के बाद वर्ष 2014 में उनकी बेटियों ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना ने यह बंगला उद्योगपति शशि किरण शेट्टी को लगभग 90 करोड़ में बेच दिया। वर्ष 2016 में किरण शेट्टी ने पुराने बंगले को गिराकर नया मकान बनाया, लेकिन उसका नाम ‘आशीर्वाद’ ही रखा।

इन्हीं लोककथाओं ने आगे चलकर सोशल मीडिया की सामग्री का रूप ले लिया। इंटरनेट पर कई लेखों और यूट्यूब चैनलों ने इस बंगले को ‘भूतिया’, ‘शापित’ और ‘अशुभ’ बताकर वीडियो और लेख प्रकाशित किए। कुछ वेबसाइटों ने तो इसे भारत के 19 कथित भूतिया घरों की सूची में भी शामिल कर दिया। इसी के खिलाफ वर्तमान मालिक शशि किरण शेट्टी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने उपरोक्त आदेश जारी किए।

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