तुकाराम मुंढे
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्य में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण, बिक्री और उपयोग पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह प्रतिबंध 30 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के तहत लागू किया गया है।
तुकाराम मुंढे ने बताया कि एनालॉग पनीर असली पनीर नहीं होता। इसे दूध के बजाय वनस्पति तेल, पाम ऑयल और अन्य गैर-दुग्ध सामग्री से तैयार किया जाता है। आम उपभोक्ता अक्सर इसे असली पनीर समझकर खा लेते हैं, जिससे उनके साथ धोखाधड़ी होने के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत फूड सेफ्टी कमिश्नर को जनहित में किसी खाद्य पदार्थ पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का अधिकार प्राप्त है और उसी अधिकार का उपयोग करते हुए यह फैसला लिया गया है।
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान राज्यभर से एनालॉग पनीर के 308 नमूने एकत्र कर उनकी जांच की गई। इनमें से 109 नमूने नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए, जबकि कई नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित भी मिले। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कड़ा निर्णय लिया गया।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाओं, कमर्शियल किचन और अन्य खाद्य सेवा संस्थानों में भी एनालॉग पनीर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रतिबंध के दौरान इसका उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री किसी भी रूप में नहीं की जा सकेगी।
तुकाराम मुंढे ने बताया कि यह प्रतिबंध फिलहाल एक वर्ष के लिए लागू किया गया है। इस अवधि के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार प्रतिबंध को जारी रखने या हटाने पर निर्णय लिया जाएगा।
एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है, जो देखने और स्वाद में पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन यह दूध से नहीं बनता। इसे मुख्य रूप से वनस्पति वसा, पाम ऑयल और अन्य गैर-दुग्ध सामग्री से तैयार किया जाता है। कम लागत के कारण इसका उपयोग कई जगह असली पनीर के विकल्प के रूप में किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं के साथ भ्रम और धोखाधड़ी की आशंका बनी रहती है।
