प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित 42.88 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तांत्रिक अशोककुमार एकनाथ खरात उर्फ कैप्टन बंधु बाबा, उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) अदालत में 3,000 से अधिक पन्नों का अभियोजन शिकायत-पत्र (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल किया है। यह मामला जबरन वसूली, धोखाधड़ी और ठगी से जुड़े अपराधों से संबंधित है।
यह शिकायत 37 गवाहों के बयानों, संपत्तियों की अस्थायी कुर्की से संबंधित पांच परिशिष्टों और बड़ी मात्रा में दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। विशेष PMLA अदालत द्वारा आने वाले दिनों में इस शिकायत पर औपचारिक संज्ञान लिए जाने की संभावना है।
शिकायत के अनुसार, अशोक खरात ने वर्षों तक एक सुनियोजित साजिश के तहत लोगों की धार्मिक आस्था और भावनात्मक कमजोरियों का फायदा उठाया। उसने स्वयं को भगवान शिव का अवतार और अलौकिक शक्तियों वाला व्यक्ति बताकर भक्तों को भ्रमित किया। ED का आरोप है कि वह लोगों को यह विश्वास दिलाता था कि वह भविष्य में आने वाली विपत्तियों की भविष्यवाणी कर सकता है या उन्हें टाल सकता है तथा बीमारियों, व्यापारिक नुकसान और व्यक्तिगत समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है। इसी बहाने वह भक्तों से “अवतार पूजा” के नाम पर भारी रकम वसूलता था।
ED के अनुसार अशोक खरात विशेष रूप से व्यापारियों को आर्थिक बर्बादी, ईश्वरीय प्रकोप या परिवार के सदस्यों की मृत्यु का भय दिखाकर निशाना बनाता था और उनसे अवतार पूजा शुल्क, दान और अन्य खर्चों के नाम पर बड़ी रकम ऐंठता था।
शिकायत में कहा गया है कि अशोक खरात अपनी दिव्य शक्तियों को साबित करने के लिए रिमोट कंट्रोल से चलने वाले नकली सांपों और बाघ की खाल जैसे साधनों का इस्तेमाल करता था। यह भी आरोप है कि उसने महिला भक्तों को संदिग्ध नशीले पदार्थ दिए और साधारण इमली के बीज, पत्थर तथा शहद को चमत्कारी और रोग निवारक बताकर बेचा।
ED का आरोप है कि अशोक खरात ने अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए सहकारी पतसंस्थाओं और बेनामी खातों का नेटवर्क बनाया। बैंक अधिकारियों और प्रबंधन की मिलीभगत से उसने राहाता स्थित समता नगरी सहकारी पतसंस्था में 108 खाते और सिन्नर स्थित जगदंबा माता ग्रामीण बिगरशेती सहकारी पतसंस्था मर्यादित में 34 बेनामी खाते खुलवाए। ये खाते अनिवार्य केवाईसी (KYC) प्रक्रिया और भौतिक सत्यापन के बिना खोले गए, जिससे भारी नकद लेन-देन को वैध बैंकिंग गतिविधि के रूप में दिखाया जा सका।
ED के अनुसार, राहाता की सहकारी संस्था में लगभग 21.25 करोड़ रुपये जमा किए गए थे, जिनमें से ब्याज सहित 23.87 करोड़ रुपये बाद में निकाले गए। वहीं सिन्नर की सहकारी संस्था में बेनामी खातों में लगभग 1.86 करोड़ रुपये जमा किए गए और परिपक्वता के बाद 3.18 करोड़ रुपये निकाले गए।
शिकायत के मुताबिक, इन खातों से निकाली गई नकदी बैंकिंग प्रणाली में नहीं रखी गई, बल्कि भरोसेमंद सहयोगियों के पास रखकर बाद में नासिक, अहमदनगर, पुणे, सोलापुर और मुंबई में अचल संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल की गई। इनमें से कई संपत्तियां अशोक खरात के परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गईं ताकि वास्तविक स्वामित्व और धन के स्रोत को छिपाया जा सके।
ED ने आरोप लगाया है कि मामले के आरोपी और अशोक खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके समता सहकारी संस्था में खोले गए लगभग 60 खातों का संचालन करते थे। अरविन्द बावके ने 18 करोड़ रुपये से 20 करोड़ रुपये तक की नकदी निकासी में मदद की, अशोक खरात के निर्देश पर धन का परिवहन किया और इसके बदले कमीशन प्राप्त किया।
इस वर्ष अप्रैल और मई के दौरान खरात और उसके सहयोगियों से जुड़े घरों, व्यावसायिक परिसरों, वाहनों और बैंक लॉकरों पर की गई छापेमारी में 13.92 करोड़ रुपये नकद, 5.18 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा, 1.12 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण, 2.60 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि फ्रीज की गई तथा एक मर्सिडीज-बेंज कार जब्त की गई। जब्त और फ्रीज की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 17.70 करोड़ रुपये बताया गया है।
ED के अनुसार तलाशी के दौरान संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद हुई, जिनके आधार पर कथित अपराध से अर्जित धन का पता लगाया गया। इसके अलावा, ED ने PMLA के तहत 19.20 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ये संपत्तियां अशोक खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात तथा परिवार के अन्य सदस्यों — सुगंधाबाई एकनाथ खरात, तृप्तबाला अशोककुमार खरात और श्रुष्टि अशोककुमार खरात — के नाम पर दर्ज हैं।
