एक भारतीय कारोबारी को आपराधिक मामले में फंसाने और उनकी करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति पर कब्जा करने के कथित प्रयास का मामला सामने आया है। आरोप है कि इसके लिए मुंबई की अदालत का एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश किया गया। मुंबई हाईकोर्ट के आदेश पर हुई जांच के बाद कुर्ला पुलिस ने इस मामले में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो नागरिकों समेत छः लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
यह मामला खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के मुताबिक, उनके पति हुसैन मोहम्मद शत्ताफ और उनकी 78 वर्षीय मां फरीदा के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर विरासत का विवाद दुबई की अदालत में चल रहा है। आरोप है कि इसी मामले में हुसैन शत्ताफ की छवि खराब करने और संपत्ति पर उनके दावे को कमजोर करने के लिए मुंबई की अदालत के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें दुबई की अदालत में पेश किया गया।
फर्जी दस्तावेजों की जानकारी मिलने के बाद शत्ताफ परिवार ने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के निर्देश पर संबंधित आदेश की जांच की गई। जांच में अदालत के रिकॉर्ड खंगाले गए और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए गए। जांच के दौरान पता चला कि फर्जी आदेश में जिस आपराधिक कार्रवाई का उल्लेख किया गया था, वह वास्तव में कभी हुई ही नहीं थी।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आदेश तैयार करने के लिए अदालत की डिजिटल हस्ताक्षर प्रणाली का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। इसके अलावा, आदेश को असली दिखाने के लिए फर्जी नोटरी की मुहर और हस्ताक्षर का भी इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस ने हुमैद मोहम्मद शत्ताफ और हलीमा सुल्तान अल ओवैस, दोनों यूएई नागरिकों, के अलावा पावर ऑफ अटॉर्नी धारक मधुकर रविराज विल्सन, केन रिचर्ड विल्सन, रजी अहमद और नोटरी शिवाजी एन. धनगे के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
बताया गया है कि एक मामले में हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की दोपहिया वाहन जब्त की गई थी। वाहन वापस लेने के लिए उन्होंने कुर्ला मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन किया था। मामला केवल जब्त वाहन तक सीमित था, लेकिन आरोप है कि अदालत के रिकॉर्ड में हेरफेर कर एक फर्जी आदेश तैयार किया गया।
इस फर्जी आदेश में कथित तौर पर यह दिखाया गया कि हुसैन शत्ताफ को 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी, पासपोर्ट धोखाधड़ी और हवाला लेनदेन से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया है और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया है। आरोप है कि इस फर्जी आदेश का इस्तेमाल दुबई की अदालत में उनके खिलाफ किया गया, ताकि उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया जा सके और पैतृक संपत्ति पर उनके दावे को कमजोर किया जा सके।
