19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं तसलीमा नसरीन, बोलीं- ‘मदरसे सिर्फ जिहादी पैदा करते हैं’

 

बांग्लादेशी मूल की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं। रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति, मदरसा शिक्षा, हिंदुओं की स्थिति और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

तसलीमा नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश में दो सरकारों के कार्यकाल के दौरान उन्हें पश्चिम बंगाल आने की अनुमति नहीं मिली, लेकिन अब तीसरी सरकार के आने के बाद परिस्थितियों में बदलाव हुआ है, जिसके चलते वह कोलकाता पहुंच सकीं। उन्होंने इसके लिए मौजूदा राजनीतिक बदलाव और भाजपा सरकार को श्रेय दिया।

मदरसा शिक्षा पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनकी नजर में मदरसों की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि “मदरसे सिर्फ जिहादी पैदा करते हैं” और सभी मदरसों को सेकुलर स्कूलों में बदल दिया जाना चाहिए।

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वहां हिंदू महिलाओं के पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार के मामलों में भी महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलते। तसलीमा ने बांग्लादेश में 1956 के हिंदू एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत बताई।

उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का समर्थन करते हुए कहा कि “एक देश, एक कानून” की व्यवस्था होनी चाहिए और महिलाओं को समान अधिकार मिलने चाहिए। उनका कहना था कि बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में भी ऐसे कानून लागू होने चाहिए, जिससे महिलाओं की स्थिति मजबूत हो सके।

तसलीमा नसरीन ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएं हुई हैं और बेगम खालिदा जिया तथा मोहम्मद यूनुस के दौर का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी बांग्लादेश से उदार और खुले विचारों वाले लोग पलायन कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है।

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