महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विशेष अदालत ने शकील शेख उर्फ मामू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उस पर सलीम डोला के नेतृत्व वाले ड्रग्स सिंडिकेट और सातारा जिले में 115 करोड़ रुपये के मेफेड्रोन (एमडी) निर्माण अभियान से जुड़े होने का आरोप है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर आरोपी के पास से सीधे मादक पदार्थों की बरामदगी आवश्यक नहीं है क्योंकि सह-आरोपी के इकबालिया बयान और बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट प्रथम दृष्टया उसके इस गिरोह से संबंध होने की ओर इशारा करते हैं।
शुक्रवार को पारित आदेश में विशेष न्यायाधीश एन. आर. प्रधान ने सह-आरोपी विशाल मोरे के बयान पर भरोसा किया। विशाल मोरे ने जांचकर्ताओं को बताया था कि शेख पिंपरी-चिंचवड़ में MD बेचता था और उसने इस सिंडिकेट से ड्रग्स खरीदने पर सहमति जताई थी।
विशाल मोरे के बयान के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में वह और शकील शेख हैदराबाद गए थे, जहां उन्होंने गिरोह के सरगना फैयाज शेख को तीन लाख रुपये और एक डोंगल सौंपा था। बयान में यह भी दावा किया गया कि दिसंबर 2023 में फैयाज शेख के निर्देश पर शकील शेख और अन्य आरोपियों ने MD बनाने के लिए जगह की तलाश की थी।
अभियोजन पक्ष ने शकील शेख और सह-आरोपी असद हसन देहलूज के बीच बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट का भी हवाला दिया। इस बातचीत में ‘एमएम’ शब्द का इस्तेमाल हुआ था, जिसे अभियोजन पक्ष ने MD के लिए इस्तेमाल किया गया कोड बताया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “इस प्रकार, प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ साक्ष्य हैं कि उसने विशाल मोरे से MD खरीदा था और फैयाज शेख के निर्देश पर MD के निर्माण के लिए जगह की तलाश की थी।”
यह मामला दिसंबर 2025 में सामने आया, जब पुलिस ने दो आरोपियों के पास से MD बरामद किया। जांच के दौरान सातारा जिले की जावली तहसील के सवारी गांव में MD बनाने की एक संदिग्ध इकाई का पता चला।
अदालत के आदेश के अनुसार, 13 दिसंबर को छापेमारी के दौरान पुलिस ने 7.518 किलोग्राम तैयार MD और सुखाने के लिए रखा गया 38.820 किलोग्राम अन्य पदार्थ जब्त किया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी एक संगठित अपराध सिंडिकेट के रूप में मादक पदार्थों का निर्माण और बिक्री कर रहे थे। इसी आधार पर उनके खिलाफ स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के साथ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के प्रावधान भी लगाए गए।
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि संगठित अपराध में किसी व्यक्ति की प्रत्यक्ष भूमिका साबित होना अनिवार्य नहीं है, यदि उसका सिंडिकेट या अपराध से संबंध स्थापित किया जा सकता है।
शकील शेख के वकील ने दलील दी कि आरोपी के पास से कोई प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है। उसके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं है और उपलब्ध साक्ष्य ड्रग्स कारोबार में उसकी संलिप्तता साबित नहीं करते।
बचाव पक्ष ने शकील शेख की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी हवाला दिया। वकील के मुताबिक, शेख रेटिनल डिस्ट्रॉफी और कोरॉइडल डिस्ट्रॉफी नामक आंखों की बीमारियों से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि सर जेजे अस्पताल में उसकी विशेष जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, न्यायाधीश ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि अस्पताल की रिपोर्ट में केवल इलेक्ट्रोरेटिनोग्राफी जांच के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख है, न कि संपूर्ण उपचार की सुविधा के अभाव का।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शकील शेख को जमानत पर रिहा किए बिना भी जांच के लिए किसी अन्य अस्पताल में ले जाया जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
