उत्तर प्रदेश के इटावा में हुए एक करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी फर्जी स्कूल प्रबंधक को मंगलवार को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी प्रबंधक ने बिना विद्यालय के ही छात्रवृत्ति का मांग पत्र भेजा था जिस पर विभागीय अधिकारियों ने भी मुहर लगा दी थी। EOW के SSP पवित्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि पकड़े गए फर्जी प्रबंधक ने करीब एक करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला किया है। इस पर ऐसे तीन और मुकदमे हैं जिसकी जांच विभाग कर रहा है।
बता दें कि वर्ष 2008-09 में इटावा में 65 विद्यालयों खिलाफ 14.61 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की कार्रवाई तेज हो गई है। इस घोटाले में कक्षा एक से लेकर पांच और 10 तक के कई ऐसे विद्यालय थे, जो सिर्फ कागजों पर ही चल रहे थे। वास्तविकता में उनका कोई अता-पता नहीं था। इस बाबत चार FIR अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज की गई थी। इसके बाद सभी विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य व उनके सहायकों के अलावा समाज कल्याण अधिकारी, समाज कल्याण पिछड़ा वर्ग और बेसिक शिक्षा अधिकारी भी नामजद किए गए थे। उस वक्त मामला जिले में सुर्खियों में रहा था। SSP पवित्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि चारों मामले 2019 में EOW को सौंपे गए थे।
इसके एक मामले की जांच के दौरान मंगलवार को लाल सिंह निवासी ज्ञानदीप कैंपस देसर मऊ रोड, इटावा की गिरफ्तारी की गई है। लालसिंह पर आरोप है कि उसने इटावा के मनिकपुर मोड़ पर कागजों में संत बीडीएस पब्लिक स्कूल दिखाकर उसमें 60-65 छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए मांग पत्र भरा था। जिसे स्वीकृत भी कर दिया गया था। उक्त मामले में 27 विद्यालयों के 11 और आरोपी भी शामिल हैं, जिन्होंने मिलकर करीब एक करोड़ का घोटाला किया था। EOW की विवेचना के दौरान पांच और आरोपियों के नाम भी बढ़ाए गए हैं। फर्जी प्रबंधक ने एक करोड़ में से कितनी धनराशि हड़पी है, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
करोड़ों का छात्रवृत्ति घोटाला 65 विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ- साथ तत्कालीन अधिकारियों के भी गले की फांस बना हुआ है। EOW के अधिकारियों की मानें तो बिना जिम्मेदारों की मिलीभगत के बिना 14 करोड़ से अधिक की धनराशि का स्वीकृत होना संभव नहीं है। इसमें प्रबंधकों और जिम्मेदारों ने मिलकर बंदरबांट किया है। तत्कालीन जिले के तीन बड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है।
