मराठी मेरी मां, अन्य भाषाएं मौसी जैसी हैं: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हिंदी दिवस और हिंदी सम्मेलन के दौरान भाषाई सौहार्द्र पर जोर देते हुए कहा कि “मराठी मेरी मां है, जबकि देश की अन्य भाषाएं मौसी जैसी हैं।” उन्होंने कहा कि अपनी मां का गौरव करते समय मौसियों का भी सम्मान बनाए रखना चाहिए।

वाशी स्थित सिडको एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित हिंदी दिवस एवं हिंदी सम्मेलन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हिंदी, मराठी समेत देश की सभी भाषाओं का एक-दूसरे के प्रति सम्मान होना चाहिए। उन्होंने सभी से भाषाओं के परस्पर सम्मान का संकल्प लेने की अपील की।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार समेत कई गणमान्य लोग मंच पर मौजूद थे।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा सीखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को एक अन्य भाषा सीखने का प्रावधान भी किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले हिंदी सम्मेलन केवल औपचारिकता के तौर पर आयोजित किए जाते थे, लेकिन अमित शाह के निर्णय के बाद यह तय किया गया कि सम्मेलन अलग-अलग राज्यों में आयोजित किया जाएगा और इसके लिए महाराष्ट्र का चयन किया गया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अंग्रेजों के दौर में भी कामकाज में हिंदी का इस्तेमाल होता था और बड़ी संख्या में लोगों ने हिंदी को अपनाया। वर्ष 1963 में हिंदी और अंग्रेजी को फिर से राजभाषा का दर्जा दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में मातृभाषा और राजभाषा के सम्मान को बढ़ावा मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वैश्विक मंचों पर हिंदी में बोलते हैं तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

देवेंद्र फडणवीस ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले तत्कालीन विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी थे और उन्होंने उस समय देश का सम्मान बढ़ाया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे स्थान पर है। हिंदी को व्यापक जनभाषा का स्वरूप देने में मुंशी प्रेमचंद जैसे साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रेमचंद की ‘गोदान’ जैसी रचनाओं ने आम इंसान के दर्द और संघर्ष को प्रभावी ढंग से सामने रखा।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश को एकजुट करने में हिंदी ने संपर्क भाषा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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