न्हावा शेवा बंदरगाह पर 25,000 किलो पाकिस्तानी तरबूज के बीज जब्त, दो गिरफ्तार

 

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने ‘ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट’ के तहत भारत में पाकिस्तान से आयातित वस्तुओं पर लगे प्रतिबंध से बचने की एक और कोशिश का पर्दाफाश किया है। 11 सितंबर से 22 अक्टूबर 2026 के बीच चलाए गए इस अभियान में न्हावा शेवा बंदरगाह पर करीब 25,000 किलोग्राम तरबूज के बीजों की खेप पकड़ी गई। पाकिस्तान मूल के इन बीजों को दुबई के रास्ते भारत लाया गया था और आयात प्रतिबंध से बचने के लिए दस्तावेजों में इन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का उत्पाद बताया गया था। इस मामले में 22 अक्टूबर 2026 को दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर DRI अधिकारियों ने न्हावा शेवा बंदरगाह पर आयात की गई करीब 25,000 किलोग्राम बीजों की खेप की जांच की। दस्तावेजों में इन्हें UAE मूल के खरबूजे के बीज बताया गया था, लेकिन जांच में ये तरबूज के बीज निकले। साथ ही, इनके पाकिस्तान मूल के होने के सबूत भी मिले।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि खेप के वास्तविक मूल देश को छिपाने के लिए सुनियोजित तरीके से माल को एक देश से दूसरे देश के रास्ते भेजा गया था। बीजों को पहले पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से एक जहाज में कंटेनरों के जरिए दुबई के जेबेल अली बंदरगाह भेजा गया। वहां माल को दूसरे कंटेनरों में स्थानांतरित कर एक अन्य जहाज से भारत रवाना किया गया।

कंटेनरों और जहाजों को बदलने के साथ ही मूल देश के बारे में गलत जानकारी दी गई और आयात संबंधी फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, ताकि खेप का पाकिस्तानी मूल छिपाया जा सके। जांच के दौरान मिले महत्वपूर्ण दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि माल पाकिस्तान से दुबई होते हुए भारत पहुंचा था। इससे दस्तावेजों में किए गए UAE मूल के दावे की पोल खुल गई।

जांच में यह भी सामने आया कि इस आयात में दो तरह से नियमों का उल्लंघन किया गया। पहला, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की 2 मई 2025 की अधिसूचना संख्या 06/2025-26 के तहत पाकिस्तान में उत्पादित या वहां से निर्यात की गई सभी वस्तुओं के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आयात और पारगमन पर प्रतिबंध है। दूसरा, DGFT की 5 अप्रैल 2024 की अधिसूचना संख्या 02/2023 के अनुसार, 1 जुलाई 2024 से भारत में तरबूज के बीजों का आयात प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।

इन उल्लंघनों के चलते करीब 2.02 करोड़ रुपये बाजार मूल्य की खेप को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के संबंधित प्रावधानों के तहत 14 अक्टूबर 2026 को जब्त कर लिया गया।

जांच में यह भी पता चला कि संबंधित आयातक ने फरवरी 2026 में इसी दुबई स्थित आपूर्तिकर्ता से 22,000 किलोग्राम खरबूजे के बीजों की एक और खेप मंगाई थी। उस समय भी दस्तावेजों में माल को UAE मूल का बताया गया था। जांच में संकेत मिले हैं कि उस खेप को भी एक देश से दूसरे देश के रास्ते भारत लाया गया था, जिससे घोषित मूल देश पर गंभीर संदेह पैदा हुआ है।

जांच में आयातक-निर्यातक कोड (IEC) धारक के बेटे और भतीजे की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि दोनों इस पूरे नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों का संचालन कर रहे थे। इनमें से एक दुबई स्थित आपूर्तिकर्ता कंपनी का मालिक और निदेशक है, जबकि उसका चचेरा भाई भारत में आयात संबंधी औपचारिकताओं और घरेलू बिक्री का काम संभाल रहा था। दोनों को 22 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।

DRI की यह कार्रवाई पाकिस्तान मूल की वस्तुओं को तीसरे देशों के रास्ते भारत लाकर आयात प्रतिबंध से बचने के प्रयासों के खिलाफ हाल में की गई अन्य कार्रवाइयों के बाद हुई है।

सितंबर 2026 में DRI ने नासिक के अंबड स्थित कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) में 13 कंटेनरों में पैक पाकिस्तान मूल के 362 मीट्रिक टन से अधिक सूखे खजूर जब्त किए थे। जांच में पता चला था कि इन्हें दुबई के जेबेल अली बंदरगाह के रास्ते भारत लाया गया था और इनके मूल देश के बारे में गलत जानकारी दी गई थी।

इसी तरह, अक्टूबर 2026 में DRI ने 295 कंटेनरों में लाए जा रहे पाकिस्तान मूल के 7,311 मीट्रिक टन औद्योगिक तथा हिमालयी सेंधा नमक के अवैध आयात का भी पता लगाया था। इस खेप को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह के रास्ते भारत लाया गया था। इसके लिए मूल देश के फर्जी प्रमाणपत्रों और चालानों का इस्तेमाल किया गया था।

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक नीति के हित में पाकिस्तान में उत्पादित या वहां से निर्यात की गई सभी वस्तुओं के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आयात और पारगमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध 2 मई 2025 को जारी DGFT की अधिसूचना संख्या 06/2025-26 के तहत लागू किया गया था।

DRI ने कहा है कि वह सीमा शुल्क धोखाधड़ी और आयात प्रतिबंधों से बचने में शामिल नेटवर्क की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य भारत की व्यापार नियंत्रण व्यवस्था की विश्वसनीयता और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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