रात को प्रेमिका से मिलने पहुंचे ASI ने पकड़े जाने पर चार लोगों को मारी गोली, एक की मौत

SSP योगेन्द्र कुमार

बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव में देर रात एक पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (ASI) चंद्रमोहन सिंह ने चार ग्रामीणों पर गोलियां चला दीं। इस घटना में 50 वर्षीय अशोक यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि तीन अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह घटना के बाद से फरार है। SSP योगेन्द्र कुमार ने बताया कि ASI चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी के लिए पांच सदस्यों वाली विशेष टीम का गठन किया गया है। चंद्रमोहन सिंह के बारे में सूचना देने वाले को मधुबनी पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। चंद्रमोहन सिंह को पुलिस सेवा से बर्खाश्त कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, बलिराजगढ़ निवासी विजय यादव की पत्नी कुछ दिनों से अपने मायके गई हुई थी। घर में विजय यादव की बेटी और पड़ोस में रहने वाले अशोक यादव की बेटी सो रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान पुलिस पिकेट पर तैनात ASI चंद्रमोहन सिंह विजय यादव के घर में दाखिल हो गया। उसकी गतिविधियों की भनक लगने पर पड़ोस में रहने वाली फूलो देवी ने बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा दी और शोर मचाना शुरू कर दिया।

शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। खुद को लोगों से घिरा देखकर ASI ने अपनी सर्विस पिस्टल निकाल ली और करीब पांच से छह राउंड फायरिंग कर दी। इस दौरान अशोक यादव, धनिक लाल यादव, फूलो देवी और विजेंद्र यादव को गोलियां लगीं।

घटना के बाद सभी घायलों को बाबूबरही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने अशोक यादव को मृत घोषित कर दिया। बाकी तीन घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

बलिराजगढ़ में पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस पिकेट स्थापित की गई थी, जहां ASI चंद्रमोहन सिंह की तैनाती थी। एसएसपी योगेन्द्र कुमार के मुताबिक, चंद्रमोहन सिंह वहां सामान लेने के सिलसिले में आता-जाता था। इसी दौरान एक महिला के साथ उसके कथित अवैध संबंध बन गए और इसके बाद उसका उस घर में लगातार आना-जाना शुरू हो गया। घटना वाली रात भी वह उसी महिला से मिलने पहुंचा था।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से ग्रामीण उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। घटना की रात ग्रामीणों ने संबंधित घर को चारों तरफ से घेर लिया। लोगों के आक्रोश से बचने और वहां से निकलने के लिए ASI ने तीन से चार राउंड गोलियां चलाईं। इसी फायरिंग में चार ग्रामीण घायल हो गए, जिनमें से एक की बाद में मौत हो गई।

चंद्रमोहन सिंह इससे पहले मधवापुर थाने में भी तैनात रह चुका है। बेनीपट्टी में कुछ महीने पहले शराब तस्करी के संदेह में एक बाइक सवार को रोकने के दौरान उसकी मौत हो गई थी। उस घटना में भी चार से पांच राउंड फायरिंग किए जाने की बात सामने आई थी। इस मामले में ASI चंद्रमोहन सिंह और डायल 112 के चालक को निलंबित किया गया था।

बलिराजगढ़ में पुलिस पिकेट बनाए जाने की पृष्ठभूमि भी पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा से जुड़ी है। मई 2026 में यहां खुदाई के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा काम में बाधा डालने और खुदाई में मिले पुरातात्विक अवशेषों की चोरी किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद एसएसपी और ग्रामीणों के बीच बैठक हुई थी, जिसमें स्थल की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती का फैसला लिया गया था।

इसके बाद से बलिराजगढ़ में एक ASI, तीन एसएएफ जवानों और दो चौकीदारों की तैनाती की गई थी। ड्यूटी पूरी होने के बाद पुलिसकर्मी आवासीय बालिका विद्यालय में ठहरते थे। पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा के उद्देश्य से ही यहां पुलिस पिकेट बनाई गई थी। हालांकि, वहां एक ASI और तीन होमगार्ड जवानों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई है।

चंद्रमोहन सिंह पहले मधवापुर थाने में भी कार्यरत रह चुका है। वहां तैनाती के दौरान भी उसके खिलाफ कुछ घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है।

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