केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL), उसके निदेशकों, प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों तथा अन्य लोगों के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को कथित रूप से 1,816.22 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की है। यह FIR 21 जुलाई को EPFO के एक प्रतिनिधि द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई।
FIR के अनुसार रिलायंस कैपिटल ने वर्ष 2013 और 2014 में सुरक्षित गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर जारी किए थे, जिनमें EPFO ने चार पोर्टफोलियो प्रबंधकों के माध्यम से 10 वर्षों के लिए 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था। सितंबर 2019 तक रिलायंस कैपिटल ने NCD की शर्तों के अनुसार EPFO को नियमित कूपन भुगतान किया। लेकिन कंपनी की क्रेडिट रेटिंग ‘D’ श्रेणी में गिरने के बाद उसने अपने भुगतान दायित्वों का पालन करना बंद कर दिया। उस समय रिलायंस कैपिटल, रिलायंस एडीए (ADA) समूह का हिस्सा थी। वर्ष 2021 में कंपनी कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में चली गई और मार्च 2025 में इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IHIL) ने इसका अधिग्रहण कर लिया।
मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) द्वारा कंपनी को CIRP में भेजे जाने के बाद EPFO ने 3,308.67 करोड़ रुपये का दावा दायर किया, जिसमें 2,500 करोड़ रुपये मूलधन और 808.67 करोड़ रुपये ब्याज शामिल था।
NCLT द्वारा समाधान योजना को मंजूरी मिलने और 19 मार्च 2025 को IHIL द्वारा कंपनी का अधिग्रहण किए जाने के बाद EPFO को 1,492.45 करोड़ रुपये की वसूली हुई। इसके बावजूद 1,007.55 करोड़ रुपये मूलधन और 808.67 करोड़ रुपये स्वीकृत ब्याज की राशि अब भी वसूल नहीं हो सकी।
EPFO ने यह शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त सूचना के आधार पर दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया है कि ED द्वारा किए गए लेनदेन ऑडिट और दस्तावेजों के विश्लेषण में अंतर-कॉरपोरेट जमा (Inter-Corporate Deposits) की मंजूरी और निगरानी में गंभीर अनियमितताएं, वित्तीय रूप से कमजोर कंपनियों को ऋण देना, धन का कथित दुरुपयोग, आंतरिक ऋण नीतियों का उल्लंघन, नए ऋण देकर खराब होती क्रेडिट स्थिति को छिपाना, समूह की कंपनियों के बड़े बकाए को राइट-ऑफ करना तथा उधार ली गई राशि का घोषित उद्देश्य से अलग उपयोग जैसे गंभीर पहलू सामने आए।
शिकायत में कहा गया है कि “ED से प्राप्त जानकारी से संकेत मिलता है कि रिलायंस कैपिटल का डिफॉल्ट केवल व्यावसायिक या वित्तीय संकट का परिणाम नहीं था, बल्कि इसके साथ कथित धोखाधड़ी, धन के दुरुपयोग और अन्य अनियमित गतिविधियां भी जुड़ी हुई थीं।” इन पहलुओं की सक्षम कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जांच आवश्यक है।
CBI ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जांच का उद्देश्य इस मामले में शामिल सभी व्यक्तियों, जिनमें सरकारी अधिकारी और निजी व्यक्ति भी शामिल हैं, की भूमिका का पता लगाना, कथित आपराधिक साजिश की जांच करना तथा निवेश की गई राशि का अंतिम उपयोग पता लगाना है।
इससे पहले भी CBI, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस एडीए समूह की चार अन्य कंपनियों—रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड—के खिलाफ सात FIR दर्ज कर चुकी है।
एजेंसी अब तक इन मामलों में चार आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है तथा समूह की विभिन्न कंपनियों से जुड़े सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन मामलों की जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही है।
