मुंबई की विशेष अदालत ने मंगलवार को वर्ष 2024 में तत्कालीन डेवलपमेंट कमिश्नर एन.पी.एस. मोंगा और पूर्व संयुक्त विकास आयुक्त एवं एस्टेट मैनेजर वी.पी. शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में दर्ज मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
CBI का आरोप था कि दोनों पूर्व अधिकारियों ने वर्ष 2016-17 के दौरान SEEPZ की इमारतों की मरम्मत और छतों की वॉटरप्रूफिंग के कार्य में एक अयोग्य एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया।
CBI के अनुसार, संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी के बिना ही कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया गया। इतना ही नहीं, यह स्वीकृत 40.48 करोड़ रुपये की सीमा से भी अधिक था, जिसमें संरचनात्मक मरम्मत और अन्य सिविल कार्यों के लिए 5 प्रतिशत आकस्मिक (कंटीजेंसी) राशि भी शामिल थी। इसके बावजूद 44.58 करोड़ रुपये का कार्यादेश जारी किया गया। इसके अलावा, प्राधिकरण की अनुमति के बिना संरचनात्मक मरम्मत के लिए अतिरिक्त 7.77 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए थे।
CBI ने यह भी आरोप लगाया था कि ऑडिट में सामने आया कि SEEPZ प्राधिकरण ने फरवरी 2017 में उक्त एजेंसी को ठेका दिया और दिसंबर 2017 तक उसे करोड़ों रुपये का अग्रिम भुगतान भी किया। ऑडिट में यह भी पाया गया कि संबंधित कंपनी आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अधिसूचित एजेंसियों की सूची में शामिल नहीं थी। इसलिए उसका चयन सामान्य वित्तीय नियमों (General Financial Rules) के भी विरुद्ध था।
हालांकि, आरोपों की जांच पूरी करने के बाद CBI ने अदालत को बताया कि उसे आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। इसलिए एजेंसी ने मामले को बंद करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा, “गहन जांच के बावजूद शिकायत में लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हो सके। आरोपियों के खिलाफ कोई अपराध प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है।”
