मुंबई की पारसी डेयरी समेत तीन डेयरियों के लाइसेंस निलंबित

 

मुंबई में प्रसिद्ध डेयरियों और दुग्ध उत्पाद निर्माताओं पर FDA ने छापेमारी की है। मरीन लाइन्स स्थित पारसी डेयरी, गोवंडी स्थित सूफी डेयरी और मुलुंड स्थित मेमर्स एसोसिएशन के प्रतिष्ठानों पर छापा मारकर इनके FSSAI लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।

सूफी डेयरी में जांच के दौरान पाया गया कि स्टेनलेस स्टील के मिल्क चिलिंग टैंक के अलावा प्लास्टिक की थैलियों और कैनों में खुला पाश्चुरीकृत भैंस का दूध संग्रहित कर उसकी बिक्री की जा रही थी।

वहीं मेमर्स एसोसिएशन में खाद्य उत्पादों पर बैच नंबर का उल्लेख नहीं था और लेबलिंग नियमों का उल्लंघन पाया गया। इसके अलावा, बिक्री के लिए रखा गया खुला पनीर वास्तव में चीज़ एनालॉग (Cheese Analogue) होने की आशंका भी व्यक्त की गई।

पारसी डेयरी की कालबादेवी स्थित इकाई के निरीक्षण में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आने के बाद उसका FSSAI लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

तुकाराम मुंढे के आयुक्त का पदभार संभालने के बाद से ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) राज्यभर में लगातार छापेमारी और सख्त कार्रवाई कर रहा है। हाल ही में धाराशिव जिले के भूम में सामने आए दूध मिलावट मामले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

धाराशिव के भूम में दूध मिलावट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को संदेह है कि पिछले छह महीनों में 23 करोड़ लीटर से अधिक मिलावटी दूध राज्यभर में बेचा गया।

आरोपियों के बिक्री रजिस्टर की जांच में सामने आया कि पिछले छह महीनों में 2 लाख 30 हजार 470 किलोग्राम निम्न गुणवत्ता वाले दूध पाउडर का इस्तेमाल किया गया। जांच के अनुसार, प्रत्येक 100 लीटर शुद्ध दूध में 10 लीटर कृत्रिम दूध मिलाया जाता था। इसी आधार पर पुलिस का अनुमान है कि राज्यभर में बेचे गए दूध में लगभग 23 करोड़ 4 लाख 70 हजार लीटर मिलावटी दूध शामिल हो सकता है।

जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि दूध में वसा (फैट) की मात्रा बनाए रखने के लिए घटिया गुणवत्ता वाला दूध पाउडर, पाम ऑयल और निरमा जैसे पदार्थ मिलाए जाते थे। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मिलावटी दूध के सेवन से किडनी, लीवर और पाचन तंत्र पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।

इस मामले में अब तक सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन सभी आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि यह अवैध कारोबार पिछले तीन वर्षों से चल रहा था। भूम का यह दूध मिलावट कांड राज्यभर में दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब जांच इस निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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