समुद्र में डकैती आतंकवादी कृत्य के समान, मुंबई सत्र न्यायालय ने 44 सोमाली समुद्री लुटेरों को सुनाई उम्रकैद

 

मुंबई की सत्र अदालत ने सोमवार को 2024 में भारतीय नौसेना द्वारा पकड़े गए 44 सोमाली समुद्री लुटेरों को समुद्री डकैती विरोधी अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने उनके कृत्य को आतंकवाद बताया। इसे समुद्री डकैती विरोधी अधिनियम, 2022 के तहत देश में पहली सजा माना जा रहा है।

समद्री लुटेरों ने पिछले सप्ताह अपना अपराध कबूल कर लिया था। उन्होंने दलील दी थी कि जेल में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. बी. डिगे ने सोमवार को उनकी दलील स्वीकार करते हुए उन्हें दोषी ठहराया। अदालत ने कहा, “समुद्र में जहाज का अपहरण करना, फिरौती के लिए चालक दल के सदस्यों को बंधक बनाना, उन्हें मारने का प्रयास करना और उन्हें मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करना तथा भारतीय नौसेना के वैध निर्देशों का पालन नहीं करना बेहद गंभीर मामला है, जो आतंकवाद के समान है।”

विशेष सरकारी वकील रंजीत सांगले ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है, क्योंकि यह समुद्री डकैती विरोधी अधिनियम, 2022 के तहत पहली सजा है। सजा को लागू करने के सवाल पर रंजीत सांगले ने कहा कि न्यायपालिका का काम कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए कानून के अनुसार फैसला सुनाना है। हालांकि, उन्होंने कहा कि दोषियों को दी गई सजा को किस तरह लागू किया जाए, यह राज्य का विशेषाधिकार है। रंजीत सांगले ने कहा, “यदि भारत सरकार चाहे तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते (Mutual Legal Assistance Treaty) के अनुसार दोषियों को सोमालिया भेज सकती है। यह पूरी तरह भारत सरकार का विशेषाधिकार है।”

44 समुद्री लुटेरों के इस समूह को भारतीय नौसेना ने मार्च 2024 में चलाए गए दो अलग-अलग अभियानों में पकड़ा था। ये लोग दो जहाजों—एमवी एक्स-रुएन (MV Ex-Ruen) और एफवी अल-कंबर 786 (FV Al-Kambar 786) के अपहरण में शामिल थे। नौसेना ने कुल 44 समुद्री लुटेरों को गिरफ्तार किया था और क्रमशः 17 तथा 23 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचाया था।

इसी महीने की शुरुआत में समुद्री लुटेरों ने अदालत को एक पत्र लिखकर सभी आरोपों में अपना अपराध कबूल करने की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि भाषा, संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली में अंतर के कारण उन्हें जेल में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, उनकी मदद या मार्गदर्शन करने के लिए जेल में उनका कोई परिवारजन या मित्र भी नहीं है। दोषी ठहराए जाने से पहले अदालत ने उन्हें अपने अपराध कबूल करने के फैसले पर दोबारा विचार करने का समय दिया था।

सोमवार को जब मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो सरकारी वकील रंजीत सांगले ने दलील दी कि सभी आरोपियों ने आरोपों की प्रकृति और उनके परिणामों को समझ लिया है तथा वे स्वेच्छा से और बिना किसी शर्त के अपना अपराध कबूल कर रहे हैं। इसलिए उनकी दोष स्वीकार करने की याचिका स्वीकार की जानी चाहिए।

हालांकि, सोमाली दूतावास की ओर से आरोपियों की सहायता कर रहे वकील ने अदालत को बताया कि दूतावास ने उन्हें अपराध कबूल न करने की सलाह दी थी। इस पर समुद्री लुटेरों ने अदालत से कहा कि उन्हें वकील पर भरोसा नहीं है और वे अपना अपराध कबूल करने की बात पर कायम रहेंगे।

इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कहा, “इस अदालत ने अपराध स्वीकार करने के मुद्दे पर विचार करने के लिए आरोपियों को पर्याप्त अवसर दिया है। आरोपियों ने सोच-समझकर विचार किया है और अब वे स्वेच्छा से तथा स्पष्ट रूप से अपना अपराध कबूल कर रहे हैं। इसलिए, उनकी दोष स्वीकार करने की याचिका स्वीकार की जाती है।”

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