केनरा बैंक से जुड़े 146.35 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार को अरबपति ज्वैलर जतिन मेहता, उनकी पत्नी सोनिया और बेटे सूरज को भगोड़ा घोषित करने का आदेश दिया।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि जून 2018 में तीनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। बताया जाता है कि मेहता का परिवार काफी समय पहले ही देश छोड़कर जा चुका है और अब तक अदालती कार्यवाही का सामना करने के लिए वापस नहीं लौटा है।
अदालत ने कहा कि आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए भगोड़ा घोषित करना आवश्यक है। यदि वे अदालत में पेश नहीं होते हैं, तो सीबीआई उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की मांग कर सकती है। हालांकि, अदालत ने तत्काल संपत्ति कुर्क करने का आदेश देने से इन्कार कर दिया। अदालत का कहना था कि इस तरह की कार्रवाई के लिए ऐसे साक्ष्य जरूरी हैं, जिनसे संकेत मिले कि संबंधित संपत्तियों को बेचे जाने या उनका हस्तांतरण किए जाने की आशंका है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी बाद में संपत्ति कुर्क करने की मांग कर सकती है।
सीबीआई के अनुसार मेहता की कंपनी फॉरएवर प्रेशियस ज्वैलरी एंड डायमंड लिमिटेड ने पंजाब नेशनल बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से कर्ज लिया था। इस समूह में केनरा बैंक भी शामिल था।
19 मार्च 2012 को केनरा बैंक की प्रबंधन समिति ने 12 करोड़ रुपये की फंड-आधारित ऋण सीमा और 150 करोड़ रुपये की गैर-फंड-आधारित ऋण सीमा को मंजूरी दी थी। कंपनी ने गैर-फंड-आधारित ऋण सीमा का इस्तेमाल करते हुए विदेशों में बुलियन बैंकों के पक्ष में स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) खुलवाए। इसके जरिए प्राप्त सोने को बाद में प्रसंस्कृत कर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के 13 खरीदारों को निर्यात किया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने इन एसबीएलसी के माध्यम से आयात किए गए सोने का भुगतान नहीं किया। इससे कैनरा बैंक को 146.35 करोड़ रुपये का अनुचित नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को इतनी ही राशि का अनुचित लाभ मिला।
यह भगोड़ा संबंधी आदेश सीबीआई की उस दलील के बाद आया है, जिसमें एजेंसी ने बताया था कि कई साल पहले जारी किए गए वारंट भी मेहता परिवार को अदालत में पेश कराने में विफल रहे हैं।
