PNB धोखाधड़ी मामले में CBI ने दादर की कपड़ा कंपनी के खिलाफ दर्ज की FIR

 

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में कपड़ा कारोबार से जुड़ी एक निजी कंपनी के खिलाफ जांच शुरू की है। कर्ज लेने वाली कंपनी और उसके निदेशकों ने धोखाधड़ी और बेईमानी की मंशा से बैंक से मिली रकम को उन उद्देश्यों के बजाय अन्य कामों में इस्तेमाल किया, जिनके लिए कर्ज मंजूर किया गया था।

CBI के मुताबिक इस मामले में बांद्रा (पूर्व) स्थित पंजाब नेशनल बैंक की एसेट रिकवरी मैनेजमेंट शाखा के मुख्य प्रबंधक देवा कुमार वाई.एन. की ओर से शिकायत मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कर्ज लेने वाली कंपनी, उसके निदेशकों और गारंटरों ने अज्ञात सरकारी कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर आपराधिक साजिश रची। इससे बैंक को 9.62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

दादर स्थित यह कंपनी कपड़ों के कारोबार में सक्रिय थी। आरोप है कि कंपनी के निदेशकों और गारंटरों ने अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर वर्ष 2013 में बैंक से कार्यशील पूंजी की सुविधा हासिल करने के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति से संबंधित फर्जी दस्तावेज और भ्रामक जानकारी पेश की थी।

इसके अलावा, कंपनी ने गिरवी रखी गई संपत्तियों के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए मूल्यांकन के आधार पर कैश क्रेडिट की सुविधा भी प्राप्त की। आरोप है कि संपत्तियों के बढ़े हुए मूल्यांकन का कर्ज मंजूर करने की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप बैंक ने गिरवी रखी संपत्तियों की वास्तविक कीमत की तुलना में अधिक राशि जारी कर दी।

CBI के एक अधिकारी ने बताया, “समय बीतने के साथ बैंक ने पाया कि कर्ज लेने वाली कंपनी ने मंजूरी पत्र में निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया। कंपनी ने ब्याज का भुगतान नहीं किया और जून-जुलाई 2013 से स्टॉक तथा बुक डेट्स (बही-खातों में दर्ज उधारी) का विवरण भी जमा नहीं किया।”

अधिकारी के अनुसार, कर्ज लेने वाली कंपनी के निदेशक ऋण की किस्तों और ब्याज का भुगतान करने में भी विफल रहे। इसके बाद बैंक ने सितंबर 2013 में कंपनी के खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित कर दिया। बाद में, अगस्त 2025 में बैंक ने इस खाते को धोखाधड़ी वाला खाता बताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इसकी रिपोर्ट दी।

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