सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिवसेना नगरसेवक रमेश म्हात्रे को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगा दी। रमेश म्हात्रे पर ठाणे जिले के एक कल्याण-डोम्बिवली महानगरपालिका (KDMC) अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप है। कोर्ट ने उन्हें तीन दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट के जमानत आदेश के खिलाफ दायर अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “यह संदेश स्पष्ट और जोरदार तरीके से जाना चाहिए कि मेडिकल बिरादरी को छुआ नहीं जा सकता। वे लोगों की सेवा करते हैं और इस तरह उन पर हमला नहीं किया जा सकता।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि म्हात्रे की घटना के बाद उसी पार्टी से जुड़ी एक ऐसी ही घटना सामने आई थी।
रमेश म्हात्रे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि मामले में दो गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर का बयान 3 अक्टूबर को दर्ज होना है। उन्होंने कहा कि मुकदमा शुरू हो चुका है और इसमें किसी तरह की बाधा नहीं आ रही है।
पीठ ने कहा कि रमेश म्हात्रे से जुड़े इस मामले में सामने आया है कि उनके खिलाफ मौजूदा मामले समेत कुल 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस पर दवे ने दलील दी कि ये सभी मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और इनमें से 18 मामलों में रमेश म्हात्रे को बरी किया जा चुका है।
हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक मामले की जल्द सुनवाई पूरी करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस निर्देश पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।
7 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रमेश म्हात्रे को जमानत देते हुए मुकदमे की सुनवाई को फास्ट-ट्रैक करने और तय समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया था। मारपीट के इस मामले में हाईकोर्ट ने चार अन्य आरोपियों को भी जमानत दी थी। जुलाई में हुई इस घटना के बाद काफी आक्रोश देखने को मिला था।
6 जुलाई 2026 को रमेश म्हात्रे और अन्य आरोपी अस्पताल पहुंचे थे। बताया गया कि एक महिला मरीज के इलाज में कथित देरी को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई। यह घटना डोम्बिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई थी। महिला गर्भवती थी और उसके परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर इलाज में देरी का आरोप लगाया था।
