महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की विशेष अदालत ने वर्ष 2019 के बहुचर्चित चिंचपोकली गोल्ड लूटकांड से जुड़े सभी सात आरोपियों पर से 28 जुलाई 2026 को मकोका हटा दिया है। विशेष न्यायाधीश एन. आर. प्रधान ने अपने फैसले में कहा कि जांच अधिकारी उपनिरीक्षक सिद्धनाथ खांडेकर की गवाही और जांच टीम द्वारा दाखिल आधिकारिक आरोपपत्र के बीच मोबाइल सिम कार्ड के स्वामित्व, मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैकिंग और आरोपियों की गिरफ्तारी के क्रम को लेकर गंभीर विरोधाभास हैं।
यह मामला (मकोका विशेष केस नंबर- 14/2019) चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पास 6 अप्रैल 2019 को रात में 1,800 ग्राम सोने के आभूषणों की लूट से संबंधित था। इस लूटकांड में पुलिस ने अयूब अलीमुद्दीन शेख उर्फ अयूब चिकना, मोहम्मद शहताज जमाल खान, राकेश राजदेव जायसवाल, फैयाज अहमद इकबाल शेख, पंकज छगनलाल सोनी, संगीता विजय नायर और मोहम्मद बिलाल कुरैशी को भारतीय दंड संहिता (IPC), शस्त्र अधिनियम, बॉम्बे पुलिस अधिनियम और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत गिरफ्तार किया था।
आरोपियों में एक पंकज सोनी के बॉम्बे हाई कोर्ट के प्रसिद्ध वकील अमित नलावड़े ने अदालत को बताया कि घटना के काफी समय बाद सार्वजनिक और सभी के लिए सुलभ स्थानों से कथित रूप से हथियार, मोटरसाइकिल और नकदी की बरामदगी साक्ष्य के मानकों पर खरी नहीं उतरती। इसके अलावा पंकज सोनी से बरामद पिघली हुई सोने की सिल्लियों की बरामदगी में भी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अमित नलावड़े ने बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 100 के तहत पुलिस ने अनिवार्य वीडियोग्राफी और लिखित पंचनामा/स्वीकृति जैसी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।
वकील अमित नलावड़े के तर्क से सहमत विशेष न्यायाधीश एन. आर. प्रधान ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
सरकार की तरफ से विशेष लोक अभियोजक (SPP) विजय मलंकर तथा अन्य आरोपियों की तरफ से तबिश मूमन, दीपक गौतम, दर्शित जैन, संदीप कर्णिक, अपेक्षा वोरा और प्रवीण पांडे ने पैरवी की।
